पार्टी की मजबूती प्राथमिकता, तृणमूल से गठबंधन बाद में : बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष
प्रदीप्तो तपादार
कोलकाता, 8 अगस्त (आईएएनएस)। कांग्रेस की पश्चिम बंगाल इकाई के नवनियुक्त अध्यक्ष मानस भूनिया ने कहा है कि गुटबाजी की शिकार राज्य इकाई में संगठन की मजबूती उनकी शीर्ष प्राथमिकता है। उनका कहना है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर तृणमूल कांग्रेस से गठबंधन बाद की बात है।
भूनिया ने आईएएनएस को दिए एक साक्षात्कार में कहा, "बतौर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करना मेरी प्राथमिकता है ताकि पश्चिम बंगाल में वह खोई प्रतिष्ठा वापस पा सके। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के कुशासन और अत्याचार से प्रदेश की जनता को मुक्ति दिलाने में हमें एक बड़ी भूमिका का निर्वाह करना है।"
उन्होंने कहा, "अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में माकपा को सत्ता से बाहर करने के लिए तृणमूल कांग्रेस से गठबंधन का मुद्दा दूसरी प्राथमिकता होगी।"
उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस से गठबंधन के पक्ष में है। "हमें माकपा नेतृत्व वाले वाम गठबंधन को पराजित करना है। यह तभी संभव है जब विपक्ष एकजुट रहेगा।"
भूनिया को गत 27 जून को पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी का स्थान लिया है।
मई महीने में हुए नगरीय चुनाव के ठीक पहले कांग्रेस-तृणमूल का गठबंधन टूट गया था। ऐसे में आंतरिक गतिरोधों को दूर कर तृणमूल कांग्रेस से गठबंधन को प्रभावी बनाना उनके समक्ष बहुत बड़ी चुनौती है।
प्रदेश कांग्रेस में व्याप्त गुटबाजी के बारे में पूछे जाने पर भूनिया कहते हैं, "यह एक लोकतांत्रिक देश हैं। इसलिए राजनीतिक मर्यादाएं बहुत जरूरी है। कांग्रेस इसका पालन करती है। हालांकि मैं किसी को राजनीतिक मर्यादाओं पर पाठ पढ़ाना नहीं चाहता लेकिन उम्मीद करता हूं कि हमारे लोग इसका पालन करेंगे।"
यह पूछे जाने पर क्या वह तृणमूल कांग्रेस के साथ समन्वय के लिए कोई तंत्र स्थापित करना चाहेंगे, उन्होंने कहा, "हां, हमारे बीच कोई ऐसा तंत्र नहीं है लेकिन यह जरूरत पर निर्भर करता है।"
हाल ही पार्टी पदाधिाकारियों के फेरबदल के बाद नेताओं में उपजे असंतोष पर भूनिया ने कहा, "हमारी पार्टी एक लोकतांत्रिक पार्टी है। मुझे खुशी है कि कुछ लोगों ने टीम में हुए फेरबदल पर असंतोष जताया है। यह फेरबदल किसी को हटाने के लिए नहीं किया गया था बल्कि नए नेताओं के लिए जगह बनाने को किया गया था। जो इस फेरबदल में जिम्मेदारी मुक्त हुए हैं, उन्हें नई जिम्मेदारी दी जाएगी।"
प्रदेश में नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार इस दिशा में जो कर रही है, वह उनकी संवैधानिक आवश्यकता है। संविधान के मुताबिक केंद्रीय अर्धसैनिक बल राज्य सरकार के कमांड में होती हैं। लेकिन राज्य सरकार इनका उपयोग नहीं कर पा रही है। वह संयुक्त बलों का दुरुपयोग कर रही है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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