थलसेना और वायुसेना ने लेह में पहुंचाई सहायता

थलसेना ने भी त्रासदी के बाद से अपने आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ को युद्धस्तर पर सक्रिय कर दिया है। यह स्थान समुद्र तल से 3,505 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

शनिवार को हुई भारी बारिश के कारण कुछ घंटों के लिए राहत अभियान रुक गया था। चीन की सीमा से लगे इस क्षेत्र में 6,000 से अधिक सेना के जवान राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हुए हैं।

वैसे तो सेना के राहत कार्य की प्राथमिकता जान-माल को बचाना है, लेकिन सैनिक, प्रभावित लोगों को भोजन, पानी, दवाएं भी मुहैया करा रहे हैं। मलबे को साफ करने के लिए सेना के बुलडोजरों और अन्य उपकरणों को लगाया गया है।

मलबे के कारण प्रभावित हुआ लेह हवाई अड्डे पर शनिवार को फिर से सेवाएं बहाल हो गई और वायुसेना के छह विमान आपदा प्रतिक्रिया दलों, चिकित्सकों, संचार उपकरणों और दिल्ली व चंडीगढ़ से सामग्रियों को लेकर वहां उतरे।

रक्षा विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा कि इन छह विमानों के पहुंचने के साथ ही राहत एवं बचाव अभियान में तेजी आ गई है।

वायुसेना के दो इल्युशिन-76 और चार एंटोनोव-32 विमानों पर 30 टन का वजन लदा था। इनमें 125 राहत एवं बचाव कर्मी, दवाएं, जनरेटर, तंबू, पोर्टेबल एक्स-रे मशीनें और आपात राहत किट शामिल थे।

विशेषज्ञ चिकित्सकों और शल्य चिकित्सकों सहित दिल्ली से केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के दो दल भी लेह पहुंच गए हैं।

प्रवक्ता ने कहा कि मलबे से 110 शवों को बरामद किया जा चुका है।

प्रवक्ता ने कहा, "अब तक 500 से अधिक घायलों का लेह के सैन्य अस्पताल में इलाज किया जा चुका है और लगभग 100 घायलों को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है। विदेशी पर्यटकों और गैर स्थानीय लोगों के शवों को दिल्ली तक ले जाने के लिए लेह से असैन्य उड़ानों की अनुपलब्धता की स्थिति में विशेष सहयोग के रूप में वायुसेना इन शवों को ढोने के लिए तैयार हो गया है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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