घाटी में हिंसा जारी, चिदंबरम ने कहा-भीड़ में आतंकवादी (राउंडअप)
घाटी में सुरक्षा बलों की गोलीबारी में कथित तौर पर बुधवार को दो और नागरिक की मौत हो गई। ताजा हिंसक घटना में मोहम्मद याकूब (27) की देर शाम मौत हो गई। उसकी मौत श्रीनगर के बेमिना इलाके के नुनद्रिशी कालोनी में कथित तौर पर पुलिस फायरिंग के दौरान हुई।
श्रीनगर के छानपोड़ा इलाके में गत शुक्रवार को उग्र भीड़ और केंद्रीय रिजर्व पुलिस (सीआरपीएफ) के जवानों के साथ हुई झड़प के दौरान गोली लगने से बुरी तरह घायल हुए इकबाल अहमद (17) ने आज दम तोड़ दिया।
इकबाल को शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस सौरा (एसकेआईएमएस) में भर्ती कराया गया। वहां आपरेशन के बाद उसे जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया था, जहां उसने दम तोड़ दिया।
एसकेआईएमएस के एक चिकित्सक ने आईएएनएस को बताया, "हमारे काफी प्रयासों के बावजूद उसने बुधवार की शाम दम तोड़ दिया।"
इकबाल को गोली उस समय लगी जब कश्मीर घाटी में व्यापक हिंसा फैली हुई थी। प्रदर्शकारी थानों, पुलिस के शिविरों एवं सरकारी संपत्ति को जला रहे थे तथा भारतीय वायु सेना, अर्धसैनिक बलों, पुलिस और सरकारी वाहनों को नष्ट कर रहे थे।
इकबाल सहित सुरक्षा बलों की ओर से की गई गोलीबारी में शुक्रवार (30 जुलाई) से लेकर अब तक 28 लोगों की मौत हो चुकी है। इससे पहले 11 जून से लेकर 29 जुलाई के बीच घाटी में 17 नागरिक मारे गए थे। सुरक्षा बलों की गोलीबारी में आम नागरिकों की मौत के विरोध में कश्मीर घाटी में 54 दिनों से हिंसा भड़की हुई है।
उधर, चिदंबरम ने जम्मू एवं कश्मीर के हालात पर लोकसभा में दिए एक बयान में कहा, "इस बात के कई उदाहरण सामने आए हैं, जब प्रदर्शनरत भीड़ से सुरक्षा बलों पर गोलीबारी की गई है। इस बात की विश्वस्त खुफिया जानकारी है कि कुछ हथियारबंद आतंकी भीड़ के साथ घुल-मिल गए हैं और उन्होंने ही सुरक्षा बलों पर गोलीबारी की है।"
चिदंबरम ने कहा कि राजनीतिक प्रक्रिया शुरू करने की संभावना तभी तलाशी जा सकती है, जब शांति बहाल हो जाएगी। "शांति और व्यवस्था बहाल हो जाए, उसके बाद मुझे भरोसा है कि हम समस्या के समाधान के लिए राजनीतिक प्रक्रिया शुरू करने की संभवानाएं तलाश सकते हैं।"
इसके साथ ही चिदंबरम ने जम्मू एवं कश्मीर के लोगों से अपील की कि वे हिंसा के दुष्चक्र को रोकें। इसके साथ ही उन्होंने प्रदर्शनकारियों को चेताया कि नासमझ हिंसा और संपत्ति का नुकसान करने से कोई समाधान नहीं निकलेगा।
चिदंबरम ने कहा, "इसके विपरीत उन्हें अपनी जान गंवानी होगी, चोटें आएंगी। इससे पूरी तरह बचा जा सकता है और इससे किसी भी कीमत पर बचा जाना चाहिए।"
उन्होंने कहा, "हम मानते हैं कि जम्मू एवं कश्मीर से संबंधित मुद्दे हमारी जनता से संबंधित मुद्दे हैं और उन सभी को राजनीतिक प्रक्रिया और जम्मू एवं कश्मीर के हर वर्ग के लोगों के साथ संवाद स्थापित कर सुलझाया जा सकता है।"
चिदंबरम ने युवकों के परिजनों से विशेष तौर से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को हिंसक गतिविधियों में हिस्सा न लेने दें।
चिदंबरम ने खासतौर से कश्मीरी युवकों के परिजनों से अपील की। उन्होंने कहा, "आपके बच्चों की सुरक्षा और बेहतरी हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है, आपकी भी यह सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इसलिए मैं आप सभी से आग्रह करता हूं कि बच्चे किसी हिंसक गतिविधि में हिस्सा न लें, यह आप लोगों द्वारा सुनिश्चित कराया जाना चाहिए।"
ज्ञात हो कि कश्मीर घाटी पिछले 54 दिनों से सुरक्षा बलों की गोलीबारी में नागरिकों की हो रही मौत के खिलाफ हिंसक प्रदर्शनों के कारण उबल रही है। पिछले 11 जून से जारी हिंसा में 46 लोग मारे जा चुके हैं और 180 लोग घायल हो चुके हैं।
चिदंबरम ने कहा कि जून और जुलाई 2010 में पथराव की 872 घटनाएं घटीं और उस दौरान 1,456 सुरक्षा कर्मी घायल हुए। चिदंबरम ने कहा कि सुरक्षा बलों ने हिंसक प्रदर्शनों के साथ निपटने में बड़े धर्य का परिचय दिया है।
उन्होंने कहा, "यह बताना मेरा कर्तव्य है कि सुरक्षा बलों ने अति गंभीर हालात में भी अति संयम बरता है। उन्होंने साहस और धैर्य का परिचय दिया है।"
चिदंबरम ने सदन को आश्वस्त किया कि जम्मू एवं कश्मीर सरकार के पास पर्याप्त सुरक्षा बल उपलब्ध हैं।
चिदंबरम ने कहा कि केंद्र सरकार मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के साथ है। केंद्र सरकार राज्य सरकार के शांति बहाली, बातचीत और घाटी के लोगों की शिकायतों को दूर करने संबंधी प्रयासों के साथ है।
चिदंबरम ने उमर अब्दुल्ला द्वारा सोमवार को दिए गए उस बयान का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि शांति बहाली के बाद ही कश्मीर की समस्या का कोई समाधान निकालने के लिए आगे की पहल की जा सकती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications