कश्मीर मसले पर भाजपा नेता प्रधानमंत्री से मिले (लीड-1)

प्रधानमंत्री से मिलने गए प्रतिनिधिमंडल में पार्टी के संसदीय दल के अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी, लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली और जम्मू एवं कश्मीर के भाजपा के विधायक शामिल थे। इन नेताओं ने प्रधानमंत्री को प्रदेश की वर्तमान स्थिति पर अपनी चिंताओं से अवगत कराया।

सुषमा ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री ने भाजपा नेताओं को कहा कि कश्मीर की मौजूदा स्थिति पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने में सरकार को किसी तरह की कोई परेशानी नहीं है।

उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में राज्य सरकार की ओर से लिए गए कुछ फैसलों से सुरक्षा बलों के मनोबल पर नकारात्मक असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने प्रधानमंत्री से इस मसले पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाए जाने की मांग की है।

सुषमा ने बताया कि प्रधानमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल से कहा कि उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता राज्य में शांति-व्यवस्था बहाल करना है।

राज्य विधानसभा में भाजपा विधायक दल के नेता चमन लाल गुप्ता ने कहा कि आज राज्य की जो स्थिति है, वह एक दिन में निर्मित नहीं हुई है। इस समस्या को बढ़ाने में राज्य के साथ केंद्र सरकार का भी योगदान कम नहीं रहा है।

उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के खिलाफ लगातार जांच बैठाई जा रही है, जिससे वे खुद रक्षात्मक स्थिति में आ गए हैं। "वे (सुरक्षा बल) स्थिति से निपटने की बजाए खुद अपनी सुरक्षा में लगे हैं।"

गुप्ता ने कहा कि जम्मू क्षेत्र के डोडा, राजौरी और पुंछ जिलों से सुरक्षा बलों को वापस बुलाया गया है। घाटी में इनकी संख्या कम की गई है।

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में चले गए लोगों के पुनर्वास संबंधी सरकार की योजनाओं की उन्होंने आलोचना की। राज्य सरकार को दी जाने वाली राशि के खर्च पर सरकार द्वारा कड़ी निगरानी रखने की भी उन्होंने बात कही।

भाजपा विधायकों ने प्रधानमंत्री को सौंपे एक पत्र में स्पष्ट तौर पर कहा कि राज्य में 11 जून के बाद स्थिति लगभग अराजक सी है। अलगाववादियों द्वारा अपनाई जा रही रणनीति के खिलाफ सरकार असहाय दिख रही है।

पत्र में कहा गया है, "राज्य सरकार की लोकप्रियता कम हुई है। मुख्यमंत्री के खिलाफ निजी असंतोष भी है। ऐसा लग रहा है कि वह अपनी ही पार्टी में अलग-थलग पड़ गए हैं। आपकी पूर्व सहयोगी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) आग को हवा देने का काम रही है।"

उल्लेखनीय है कि कश्मीर घाटी में गत 11 जून से जारी हिंसा में अब तक 47 लोगों की जान जा चुकी है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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