सरकार संवेदनहीन और विश्वासघाती : सुषमा
लोकसभा में मंगलवार को 'अर्थव्यवस्था पर मुद्रास्फीति का दबाव और आम आदमी पर इसका प्रतिकूल प्रभाव' संबंधी प्रस्ताव पेश करते हुए सुषमा ने कहा कि यह सरकार संवेदनहीन और विश्वासघाती इसलिए है क्योंकि यह सरकार आम आदमी के नाम पर चुनाव जीतकर आई थी और उसने उन्हीं पर महंगाई का बोझ लाद दिया।
उन्होंने कहा कि जून, 2008 में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल के दाम 134 डॉलर प्रति बैरल थे उस समय दाम नहीं बढ़ाया गया जबकि आज 74 डॉलर प्रति बैरल है और दाम बढ़ा दिया गया है। जाहिर है 2008 चुनाव से पहले का वर्ष था इसीलिए वृद्घि नहीं की गई और आम आदमी के नाम पर चुनाव जीतकर बाद में उसी के साथ विश्वासघात किया गया।
उन्होंने कहा कि रसोई गैस महंगी होने से सरकार ने आम गृहणी को वापस चूल्हा फूंकने पर ढकेल दिया है। उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम पदाथरें के दामों में की गई वृद्घि केवल बजट घाटे को पूरा करने के लिए की गई है, जिससे सरकार को 33 हजार करेाड़ रुपये की अतिरिक्त आय होगी परन्तु इसका बोझ आम आदमी को उठाना पड़ेगा।
सरकार की अनाज वितरण प्रणाली की भी जमकर आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि एक तरफ तो करोड़ों लोग अन्न को तरस रहे हैं, भूखे मर रहे हैं तो दूसरी ओर लाखों टन अनाज सरकारी गोदामों के बाहर सड़ रहा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर का हवाला देते हुए कहा कि वहां 3 लाख 97 हजार अनाज की बोरियां खुले आसमान के नीचे पड़ी हैं।
सुषमा ने कहा कि सभी दल महंगाई को लेकर चिंतित हैं। विपक्ष में बैठे दल पुरजोर तरीके से इस मुद्दे को उठा रहे हैं जबकि सरकार के सहयोगी दल दबी जुबान से। सरकारी पक्ष के सांसद भी मजबूरी में चुप हैं।
उन्होंने कहा, "हम यदि शुद्घ विपक्ष की राजनीति करें तो इस सरकार के अलोकप्रिय होने से हमें ही फायदा है लेकिन फायदा और नुकसान व्यापार की भाषा है और हम व्यापारी नहीं प्रहरी हैं। महंगाई पर अंकुश लगाना और आम आदमी को राहत देना सबकी नैतिक जिम्मेदारी है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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