'बस पानी न बरसे'

'बस पानी न बरसे'

नितिन श्रीवास्तव

बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

दिल्ली के आसपास के लोगों ने शनिवार और रविवार को हुई बारिश का मज़ा तो ले लिया, लेकिन राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजक, सरकारी अफ़सरान और ठेकेदारों के पसीने इस मौसम में भी बह रहे हैं.

वजह है दिन पर दिन करीब आती राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन की तारीख़.

लगातार हुई बारिश ने पहले से ही लचर निर्माण कार्य पर लगाम सी लगा दी है. शहर में सैकड़ों ऐसे स्थल हैं जहाँ पर मरम्मत और नई परियोजनाओं पर काम जारी है.

पर इन दिनों घर से बाहर कदम रखने भर की देर है. ज़्यादातर नागरिक टूटी फूटी सड़कों, उनके इर्द-गिर्द खुदे हुए गड्ढों और आधे अधूरे फ्लाई ओवरों को कोसते ही नज़र आते हैं.

मैंने भी शुरुआत की दिल्ली की 'नाक' कहे जाने वाले कों कनाट प्लेस इलाके से और आलम ये था कि बारिश की पानी और बंद पड़ी हुई मशीनों के चलते पचासों मज़दूर एक टेंट के नीचे चाय की चुस्कियां ले रहे थे.

झाँसी से काम करने आये रामबरन ने बताया,"अब हम लोग क्या करें, जो भी काम करते हैं वो बारिश से बिखर सा जाता है. पता नहीं ख़त्म कब जा कर होगा ये सब. अब काम नहीं है तो चाय पीने के बजाय और क्या करें?"

खुदी हुई सड़कों को कोसते हुए मैंने रुख किया दिल्ली की शान कहे जाने वले जवाहरलाल नेहरु स्टेडियम का. आज सुबह सुबह ही केंद्रीय शहरी और विकास मंत्री जयपाल रेड्डी ने यहाँ पर कुश्ती के अखाड़े का उदघाटन किया था. उदघाटन के बाद पत्रकारों को परिसर के भीतर जाने की इजाज़त नहीं थी.

मैंने नज़र दौडाई! लाल मिटटी के कीचड़ से भरे एक रास्ते से रेड्डी अन्दर अपनी गाड़ी में सवार हो कर गए थे और शायद ये गौर नहीं कर सके कि पहले से ही टूटे रास्ते पर अब कीचड़ के छोटे-मोटे तालाब से बन गए हैं.

परिसर की छत एक महीने पहले ही टपकने लगी थी और आसपास काम कर रहे मजदूरों के मुताबिक़ पिछले दो दिनों की बारिश से हालात दोबारा वही हो गए हैं.

राष्ट्रमंडल खेलों के लिए तैयार किए जा रहे तीन और खेल परिसरों का हाल कुछ ऐसा ही है. यमुना स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स, सीरी फोर्ट खेल परिसर और करनी सिंह शूटिंग रेंज में भी बारिश का पानी रिसने की खबरें आई हैं.

स्टेडियम के बाहर काम रहे मजदूरों में से एक भगेलू राम ने कहा," साहब! अन्दर की छत तो सुना है बह रही है. साहब लोगों ने कहा है कि बाहर किसी से बात भी नहीं करनी है. पर हाँ छत के उस हिस्से की मरम्मत का काम भी कल रात से शुरू हो गया है. देखिए कब तक होता है. बस पानी ना बरसे अब और."

दूसरी तरफ दिल्ली सरकार का दावा है कि समय पर सभी निर्माणाधीन कार्य संपन्न कर लिए जाएंगे. उधर खेल आयोजन समिति के मुखिया सुरेश कलमाडी ने पहले ही साफ कर दिया है कि सभी क्रीड़ा स्थलों को अपने अधिकार में तभी लेंगे जब काम संतोषजनक होगा.

पर इन सब पर मंडरा रही है केंद्रीय सतर्कता आयोग की वो रिपोर्ट जो कहती है कि ज़्यादातर निर्माण कार्य में ढिलाई बरती गयी. समय कम है और काम ज्यादा! थोड़ी शंका से ही सही पर मन में ज़रूर दौड़ रही है पूर्व खेल मंत्री और राज्य सभा सांसद मणिशंकर अय्यर का बयान कि उन्हें दुख होगा अगर राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन सफलतापूर्वक हो जाता है तो!

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