देश भर के एफसीआई गोदामों में सड़ रहे खाद्यान्न
नई दिल्ली, 27 जुलाई (आईएएनएस)। प्रशासन की लापरवाही के कारण देश भर में स्थित भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के गोदामों में बड़ी मात्रा में खाद्यान्न अनाज सड़ रहे हैं। यह खुलासा सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत हुआ है।
आरटीआई के जरिए यह पता चला है कि इस वर्ष पहली जनवरी को एफसीआई के गोदामों में 10,688 लाख टन अनाज सड़ा हुआ पाया गया। अनाज की इतनी मात्रा 10 वर्षो तक छह लाख लोगों के भोजन के लिए पर्याप्त थी।
1997 और 2007 के बीच 1.83 लाख टन गेहूं, 6.33 लाख टन चावल, 2.20 लाख टन धान और 111 लाख टन मक्का एफसीआई के विभिन्न गोदामों में नष्ट हो गया।
देव आशीष भट्टाचार्य ने 6 जनवरी, 2010 को इस बाबत आरटीआई आवेदन दाखिल किया था।
भट्टाचार्य ने कहा, "एफसीआई के गोदामों में अनाजों के समुचित भंडारण के लिए पर्याप्त जगह है। फिर भी बड़ी मात्रा में अनाज गोदामों के परिसर में खुले आसमान के नीचे सड़ रहे हैं, दूसरी ओर लाखों लोग भूखे हैं। यह एक राष्ट्रीय शर्म है।"
एफसीआई के छत वाले गोदामों की कुल भंडारण क्षमता 225.64 लाख टन है और वहां रखे गए अनाजों की कुल मात्रा 218.35 लाख टन है।
उत्तर क्षेत्र में एफसीआई के छत वाले गोदामों की कुल भंडारण क्षमता 127.48 लाख टन है, जबकि उनमें मात्र 111.22 लाख टन अनाज ही रखे गए हैं।
दक्षिणी क्षेत्र में छत वाले गोदामों की कुल भंडारण क्षमता 57.39 लाख टन है, जबकि वहां जमा कुल अनाज की मात्रा 54.24 लाख टन है।
पूर्वी क्षेत्र में छत वाले गोदामों की कुल भंडारण क्षमता 23.99 लाख टन है, जबकि वहां मात्र 17.10 लाख टन अनाज ही रखे गए हैं।
पूर्वोत्तर क्षेत्र में छत वाले गोदामों में कुल 4.48 लाख टन अनाज रखा जा सकता है, जबकि वहां मात्र 3.50 लाख टन अनाज ही रखे गए हैं।
पश्चिमी क्षेत्र में छत वाले गोदामों की कुल भंडारण क्षमता 43.30 लाख टन है, जबकि वहां उपलब्ध अनाज की मात्रा मात्र 32.29 लाख टन ही है।
भट्टाचार्य ने कहा, "एफसीआई के गोदामों में बड़ी मात्रा में अनाज भंडारण की पर्याप्त क्षमता है। फिर भी वहां खाद्यान्नों को क्यों नहीं रखा जाता और इतनी बड़ी मात्रा में अनाज क्यों सड़ रहे हैं? जहां लाखों की संख्या में लोग भूखे जीवन बिता रहे हों, ऐसे में इस लापरवाही के लिए सरकार पूरी तरह जिम्मेदार है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications