सीबीआई पर प्रधानमंत्री का बयान, भाजपा के तेवर कड़े (राउंडअप)
सोमवार को आरंभ हुए मानसून सत्र में इस आशंका के बीच कि विपक्ष सीबीआई के कथित दुरुपयोग के मुद्दे पर संसद में हंगामा करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा, सरकार की तरफ से खुद मोर्चा संभालते हुए प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि विपक्षी दलों की ओर से जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वे गलत हैं। प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों से संसद का कामकाज सुचारु ढंग से चलने देने का आह्वान भी किया।
प्रधानमंत्री ने संसद के बाहर संवाददाताओं से कहा, "सीबीआई के दुरुपयोग के आरोप का मैं खंडन करता हूं। यह कांग्रेस जांच ब्यूरो नहीं है। सीबीआई कांग्रेस का मुखपत्र नहीं है।"
सिंह ने कहा कि सरकार गुजरात के पूर्व गृहराज्य मंत्री अमित शाह की गिरफ्तारी से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है।
सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले में शाह की गिरफ्तारी के पीछे कांग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार का हाथ होने के विपक्ष के आरोप का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से हो रही है। केंद्र सरकार का इस मामले से कुछ भी लेना देना नहीं है। केंद्र सरकार ने जांच को किसी भी तरह से प्रभावित करने का प्रयास नहीं किया।
उन्होंने कहा, "यहां हम राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर बहस करने के लिए हैं। विपक्ष जिस भी मुद्दे पर चाहे सरकार उस पर बहस के लिए तैयार है। हम चाहते हैं कि संसद की कार्यवाही सुचारु ढंग से चले। भारत की जनता भी यही अपेक्षा करती है।" प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद के मानसून सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाएंगे।
प्रधानमंत्री के बयान के कुछ घंटों के भीतर ही भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने मुंबई में कहा कि सीबीआई कांग्रेस का राजनीतिक हथियार बन चुकी है। कांग्रेस ने सीबीआई के मार्फत भाजपा के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया है, जिसे वह चुनौती के रूप में लेती है और वह इसका पर्दाफाश करके रहेगी।
यहां संवाददाताओं से बातचीत में गडकरी ने कहा, "सीबीआई कांग्रेस का राजनीतिक हथियार है। वह इसका दुरुपयोग करती है।"
उन्होंने कहा, "पिछले दिनों भी हमने लोकसभा में कटौती प्रस्ताव के दौरान देखा कि किस प्रकार कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) मायावती को सीबीआई का भय दिखाकर इसका राजनीतिक लाभ लिया।"
गुजरात के पूर्व गृह मंत्री अमित शाह मामले का जिक्र करते हुए गडकरी ने कहा, "हाल के दिनों की घटनाएं भी राजनीति से प्रेरित हैं। इनमें भी कांग्रेस ने सीबीआई का राजनीतिक दुरुपयोग किया।"
गडकरी ने यह भी कहा कि कथित फर्जी मुठभेड़ में मारा गया सोहराबुद्दीन शेख व्यापारी नहीं बल्कि एक आतंकवादी था। वह कुख्यात दाउद इब्राहिम की गैंग का सदस्य था। उन्होंने कहा कि उसके खिलाफ गुजरात महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान में दो दर्जन से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे।
उन्होंने कहा कि मानवाधिकार आयोग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2003 से 2007 के बीच देश भर में 712 फर्जी मुठभेड़ की घटनाएं हुईं। इनमें से गुजरात में 17, उत्तर प्रदेश में 231 आंध्र प्रदेश में 22 और शेष राज्यों में अन्य घटनाएं हुईं। ऐसे में सिर्फ गुजरात के मामले को ही क्यों तूल दिया जा रहा है।
इस बीच, अमित शाह ने सीबीआई की विशेष अदालत में जमानत याचिका दायर की। अदालत ने इसकी सुनवाई की तारीख दो अगस्त मुकर्रर की है।
जाने-माने वकील राम जेठमलानी शाह की ओर से अदालत में पेश हुए और यह याचिका दायर की। शाह ने रविवार को सीबीआई के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था। बाद में उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।
सीबीआई ने इससे पहले शाह से जेल में पूछताछ की अदालत से इजाजत मांगी थी। अदालत ने पूछताछ की इजाजत दे दी है। उधर, पूर्व पुलिस उपाधीक्षक एन. के. अमीन ने इस मामले में सरकारी गवाह बनने का फैसला किया। अमीन भी इस मामले में अभियुक्त हैं।
अमीन के वकील ने सोमवार को इस संबंध में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की अदालत के समक्ष आवदेन दायर किया। अमीन के इस कदम से शाह की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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