जनजातीय महिलाओं का नक्सल विरोधी प्रदर्शन
महिलाओं ने नक्सली संगठन में उन्हें शामिल करने के लिए दबाव डालने के खिलाफ प्रदर्शन किया।
महिलाओं ने पुलिस संत्रास विरोधी जनसाधारण कमेटी (पीसीएपीए) के सदस्यों के कथित उत्पीड़न के खिलाफ एक समिति का भी गठन किया है।
झारग्राम के राधानगर, शक्तिनगर, गायघाट गांवों से हजारों की संख्या में महिलाएं हाथ में डंडा और झाड़ू लिए अभियान में जबर्दस्ती शामिल होने के पीसीएपीए के निर्देश का विरोध किया।
राधानगर गांव की एक गृहणी साबित्री महतो ने कहा, "हथियारबंद नक्सलियों के साथ पीसीएपीए के करीब 20 सदस्य गुरुवार रात में राधानगर स्थित एक विद्यालय के खेल मैदान में एकत्रित हुए और झारग्राम में उनके अभियान में शामिल होने के लिए हम पर दबाव डाला। जब हमने उनका विरोध किया तो उन्होंने पीटना शुरू कर दिया।"
महतो ने कहा, "हमने उनसे कहा कि हमारे पास भारी काम है। हम खेत में पति की मदद करने और बच्चों की देखभाल करने के बाद समय मिलेगा तो सोचेंगे।"
उन्होंने बताया, "उनके अभियान में शामिल होने से इंकार करने पर उन्होंने हमें लाठी और हथियारों से पीटा और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।"
पुलिस ने बताया कि नक्सली और पीसीएपीए के सदस्यों ने दबाव बढ़ने पर बम फेंका और हवा में गोली दागकर भाग गए।
झारग्राम में अपर पुलिस अधीक्षक (अभियान) मुकेश कुमार ने बताया, "सुबह हजारों महिलाएं एकत्रित हो गईं और नक्सलियों व पीसीएपीए सदस्यों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर दिया।"
कुमार ने बताया, "यह अच्छा संकेत है कि ग्रामीणों को लगने लगा है कि नक्सली उनके साथ अच्छा नहीं कर रहे हैं। उन लोगों ने कहा कि नक्सली और पीसीएपीए सदस्य अपनी रैलियों में शामिल होने के लिए ग्रामीणों पर दबाव डालते हैं।"
कुमार ने महिलाओं को सुरक्षा मुहैया कराने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा, "हम महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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