हसीना सरकार 'ऐतिहासिक बदलाव' की ओर
हसीना ने कहा, "1972 के संविधान में बदलाव की जरूरत है। इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था बरकरार रहेगी और भविष्य में सत्ता पर सेना के कब्जे के रास्ते भी बंद हो जाएंगे।"
बांग्लादेश की संसद में बुधवार को 15 सदस्यीय एक समिति के गठन को मंजूरी मिल गई। यह समिति संविधान की समीक्षा करेगी। विपक्षी दलों ने सरकार के इस प्रयास का विरोध करते हुए संसद की कार्यवाही का बष्किार किया था।
वर्ष 1975 में हसीना के पिता और बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर्रहमान की हत्या के बाद सैन्य शासन आया था। 15 महीने के सैन्य शासन के दौरान संविधान में कई संशोधन और राजनीतिक स्तर भी बदलाव किए गए। उस दौरान बांग्लादेश तख्तापलट और मार्शल लॉ का गवाह बना था।
स्थानीय समाचार पत्र 'डेली स्टार' का कहना है, "संविधान में सैन्य शासन के समय हुए बदलावों से राज्य का मौलिक सिद्धात बदल गया। इससे संविधान का धर्मनिरपेक्ष चरित्र खत्म हो गया और धर्म पर आधारित राजनीति होने लगी।"
गौरतलब है कि संसदीय समिति के गठन में मुख्य विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की राय नहीं ली गई। इस पर बीएनपी को आपत्ति है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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