भिखारी के हाथों बिका बच्चा, ट्रेन हादसे में घायल
सूरी। जरा सोचिए 12 साल के अशरफुल हक पर क्या बीत रही होगी। कुछ दिन पहले उसी के पिता ने उसे एक अंधे भिखारी के हाथों बेच दिया। अशरफुल उस भिखारी को अपना भविष्य मान बैठा था, लेकिन किसमत को शायद यह मंजूर नहीं था। सोमवार को हुए रेल हादसे में भिखारी की मौत हो गई और उस बच्चे का बचा-कुचा भविष्य भी अधर में लटक गया।
सोमवार को दुर्घटनाग्रस्त हुई वनांचल एक्सप्रेस में घायल हुए 12 साल के अशरफुल हक पर मुसीबतों का पहाड़ टूटा है। मालदा जिले का अशरफुल अपने नए मालिक के साथ रांची जा रहा था, लेकिन पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले में हुई रेल दुर्घटना में उस भिखारी की मौत हो गई। अशरफ मालदा जिले के शामसी के निवासी इंतेजाब का बेटा है।
मुआवजा भी नहीं मिलेगा आसानी से
सूरी जिला अस्पताल में भर्ती अशरफुल ने कहा, "मेरे पिता बहुत गरीब हैं। मेरे दो भाई हैं। कड़ी मेहनत के बावजूद हम दो वक्त का खाना मुश्किल से जुटा पाते हैं।" रेल हादसे में अशरफुल का दायां पैर टूट गया है और उसे हाथ और चेहरे पर कई चोटें आई हैं।
उसने बताया, "मेरे पिता ने मुझे सेगर अली को बेच दिया था। वह अंधा था, मुझे नहीं पता कि इससे मेरे पिता को कितना पैसा मिला। सेगर मुझे अपने घर रांची ले जा रहा था जहां वह मुझसे भीख मंगवाना चाहता था। लेकिन उसकी मौत हो गई है। मैं नहीं जानता कि अब मैं क्या करूंगा।"
रेलवे के दो अधिकारियों ने मंगलवार को अस्पताल का दौरा किया और वे अशरफ को 25,000 रुपये का मुआवजा देने पहुंचे लेकिन वे अशरफ की मुश्किलों का अंत नहीं कर सके। कम उम्र होने के कारण इस रकम को उसके रिश्तेदारों को ही दिया जा सकता है।
अशरफुल ने कहा, "मैंने उन्हें मेरे पिता का मोबाइल नंबर दिया वह यहां पैसा लेने आने के लिए तैयार थे। मैंने रेलवे अधिकारियों को अपनी दुर्दशा बताई।" अधिकारियों ने अशरफ से कहा कि यदि उसके पिता ने उसे बेचा है तो वे उसे पैसा नहीं देंगे यह पैसा वे उसकी मां को देंगे। अशरफ ने बताया कि अब पैसा मिलने में और देर होगी।












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