मस्जिद नहीं, अयोध्या में सिर्फ मंदिर बनेगा: विहिप

महंत ने कहा कि मंदिर निर्माण में विलम्ब स्वीकार्य है, लेकिन सौदेबाजी स्वीकार नहीं है। श्रीराम जन्मभूमि संसार में एक ही है। जो भूमि अधिग्रहीत है उसका असली स्वामित्व रामलला का है। महंत ने यह बात विहिप की एक बैठक में कही।
मंदिर के लिए जनशक्ति जुटाएगी विहिप
बैठक में विहिप के अन्तर्राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंहल ने कहा कि रामलला को बहुत दिनों से तिरपाल के नीचे नहीं देखा जा सकता है। हिन्दुओं को संकल्प लेकर मंदिर निर्माण में जुटना होगा। जिस प्रकार से पूर्व में निर्माण के रास्ते की बाधाएं दूर कर दी गईं उसी प्रकार से कर्तव्य शक्ति के बल पर मंदिर का निर्माण करना है।
उन्होंने कहा कि हनुमत जागरण अभियान और उसके बाद देश के आठ हजार प्रखण्डों में आयोजित होने वाले महायज्ञ व जनसभाओं के माध्यम से सम्पूर्ण देश में प्रचण्ड जनशक्ति का जागरण होगा। यदि आवश्यकता पड़ी तो हम इसी अभियान में से विराट आन्दोलन का श्रीगणेश करेंगे।
किसी भी दल को शामिल नहीं करेंगे
विहिप के अन्तर्राष्ट्रीय महामंत्री डा. प्रवीण तोगड़िया ने कहा कि श्रीराम मंदिर वहीं बनेगा जिस स्थान पर रामलला विराजमान हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या की शास्त्रीय सीमा में अब कोई मस्जिद नहीं बनने दी जाएगी और इसी तरह बाबर के नाम पर अब किसी मस्जिद का निर्माण पूरे भारत में नहीं होने देंगे। उन्होंने मंदिर निर्माण आन्दोलन में अब किसी भी दल के राजनेताओं को जगह न दिए जाने की घोषणा की।
बैठक में मौजूद अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत ज्ञानदास ने कहा, "कटेंगे, मिटेंगे पर राम मंदिर नहीं छोड़ेंगे। देशभर के साधु-संत जरूरत पड़ने पर धर्म की रक्षा के लिए अपने कर्तव्य का निवर्हन करेंगे। अखाड़ों की स्थापना ही हिन्दू समाज की रक्षा के लिए की गई है। हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ता गांव-गांव में हनुमान की शक्ति का जागरण करेंगे और 1992 के आन्दोलन के दूसरे चरण में मंदिर का निर्माण सुनिश्चित होगा।"
दो दिनों तक चली प्रबंध समिति की इस बैठक में कश्मीर, मणिपुर और सिक्किम की वर्तमान परिस्थितियों पर तथा नक्सलवाद की समस्या पर प्रस्ताव पारित किया गया।












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