नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई लंबी खिंचेगी : रमन सिंह
सुजीत कुमार
रायपुर, 21 जुलाई (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह का कहना है कि नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई लंबी खिंचेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नक्सलियों का सफाया करने में सक्षम है।
सिंह ने आईएएनएस को दिए विशेष साक्षात्कार में कहा, "छत्तीसगढ़ सरकार नक्सलियों के खिलाफ युद्ध में हार नहीं रही है। सरकार नक्सलियों का खात्मा करने में पूरी तरह सक्षम है।"
उन्होंने कहा, "छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की समस्या 25-30 साल पुरानी है। इन वर्षो के दौरान हिंसा होती रही है लेकिन बीते कुछ वर्षो से इसमें तेजी आई है। हमारी कई उपलब्धियों की बजाय राज्य हिंसा के कारण चर्चा में रहा। हमने राज्य के 17 लाख गरीब परिवारों के बीच खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करके मिसाल पेश की परंतु नक्सल हिंसा में ये उपलब्धियां दब गई हैं।"
छत्तीसगढ़ के नवंबर, 2000 में गठन के बाद से नक्सली हिंसा में 2,000 लोग मारे गए हैं, इनमें 1,000 नागरिक थे।
आंध्र प्रदेश में नक्सलवाद के खिलाफ मिली सफलता से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा, "छत्तीसगढ़ नया राज्य है और यहां पुलिस का आधुनिकीकरण चार साल पहले आरंभ हुआ। दूसरी ओर आंध्र प्रदेश में पुलिस को आधुनिक बनाने का काम 10 साल से भी पहले शुरू हुआ था।"
उन्होंने कहा, "नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई लंबी खिंचेगी। हमें धर्य रखना चाहिए। मुझे पूरा भरोसा है कि छत्तीसगढ़ भी आंध्र प्रदेश की सफलता दोहराएगा।"
पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा समय में नक्सलियों के खिलाफ अभियान में 40,000 जवान तैनात हैं। इनमें से लगभग आधे जवान अर्धसैनिक बलों के हैं। राज्य में नक्सलियों से लड़ने के लिए जून, 2005 में सशस्त्र आंदोलन 'सलवा जुडूम' की शुरुआत भी की गई थी।
रमन सिंह ने कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह को भी आड़े-हाथों लिया। दिग्विजय आरोप लगाते रहे हैं कि छत्तीसगढ़ सरकार नक्सल मुद्दे से सही ढंग से नहीं निपट रही।
मुख्यमंत्री ने कहा, "केंद्रीय गृह मंत्री नक्सल मुद्दे पर कई बार छत्तीसगढ़ सरकार के साथ कई बार बैठकें कर चुके हैं। इसी साल केंद्रीय गृह सचिव ने भी हमारे साथ बैठक की। ये दोनों लोग हमारी आलोचना नहीं करते तो फिर अन्य लोगों को दखल देने की कया जरूरत है?"
गौरतलब है कि इस साल नक्सली हमलों में अर्धसैनिक बलों के 200 से अधिक जवान मारे गए हैं। पिछले छह अप्रैल को दंतेवाड़ा जिले में नक्सलियों के हमले में 76 लोग मारे गए थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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