नेपाल को नहीं मिल पाया प्रधानमंत्री
काठमांडू। नेपाल में पिछले दो वर्षो के दौरान प्रधानमंत्री पद के तीसरे चुनाव का बुधवार की रात विफलता के साथ अंत हो गया। माओवादियों को उस समय करारा झटका लगा, जब सांसदों ने प्रधानमंत्री पद के दावेदारों को खारिज कर दिया और उनमें से किसी को भी प्रधानमंत्री पद देने से इंकार कर दिया।
खासतौर से माओवादियों के प्रमुख पुष्प कमल दहाल प्रचंड के लिए यह शर्मनाक स्थिति रही, जिन्होंने 10 वर्षो तक सशस्त्र संघर्ष किया था और 2008 में भारी जीत हासिल की थी और नेपाल की पहली माओवादी सरकार का नेतृत्व किया था।
55 वर्षीय प्रचंड उस समय सन्न रह गए, जब नेपाली संसद के अध्यक्ष सुभाष नेमबांग ने घोषणा की कि प्रचंड को मात्र 242 मत मिले हैं। यह संख्या 601 सदस्यीय सदन में सामान्य बहुमत के लिए जरूरी 301 की संख्या से कम है। जहां 114 सांसदों ने प्रचंड के खिलाफ मतदान किया, वहीं 236 सांसदों ने मतदान में हिस्सा ही नहीं लिया। चूंकि माओवादियों की पार्टी सदन में सबसे बड़ी पार्टी है और उसके पास अपने 237 सांसद है, लिहाजा मतदान से यह साबित हुआ है कि उसे अन्य पार्टियों से मात्र पांच मत ही मिले हैं।
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प्रचंड के प्रतिद्वंद्वी और पूर्व उप प्रधानमंत्री राम चंद्र पौडल की स्थिति और खराब रही। उन्हें मात्र 124 सांसदों के मत मिले। जबकि 235 सांसदों ने उनके खिलाफ वोट दिया और 228 अनुपस्थित रहे। नेपाली कांग्रेस (एनसी) के साथ अभी 114 सांसद हैं। इसका मतलब यह हुआ कि उन्हें बाहरी 10 सांसदों का वोट मिला। चुनाव उस समय मजाक बन गया, जब तीसरे दावेदार ने अपनी उम्मीदवारी वापस लेने की घोषणा कर दी।
नेपाल की एकीकृत कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी लेनिनवादी (यूएमएल) ने तय किया कि वह अपने उम्मीदवार झालानाथ खनल को तभी चुनाव में उतारेगी, जब उसके पास 400 से अधिक सांसदों का समर्थन होगा। खनल की उम्मीदवारी वापस होने की स्थिति में पार्टी ने व्हीप जारी कर अपने सांसदों को बाकी दोनों में से किसी भी उम्मीदवार को वोट नहीं देने का निर्देश दिया है।
माओवादी पार्टी ने यूएमएल के उम्मीदवार झालनाथ खनल को अपना समर्थन देने की घोषणा की थी और उन्होंने शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने संबंधी पूर्व गुरिल्लाओं की शर्तो से सहमति जताई थी। लेकिन चुनाव शुरू होने से केवल कुछ समय पहले ही माओवादी पार्टी के उपाध्यक्ष बाबूराम भट्टराई ने कहा कि पार्टी ने खनल का समर्थन नहीं करने और पार्टी प्रमुख पुष्प कमल दहाल 'प्रचंड' को उम्मीदवार बनाने का फैसला किया है। इसके कारण दोपहर 11 बजे होने वाला मतदान टाल दिया गया।
गतिरोध को बढ़ाते हुए तराई की चार क्षेत्रीय पार्टियों ने कहा कि वे किसी भी उम्मीदवार का समर्थन नहीं करेंगी। इन पार्टियों के कुल 82 सांसद हैं। किसी भी उम्मीदवार को प्रधानमंत्री बनने के लिए 301 वोट हासिल करने जरूरी हैं।
अब प्रधानमंत्री पद की लड़ाई केवल प्रचंड और नेपाली कांग्रेस के उम्मीदवार के बीच होने के बावजूद करीब 200 सांसदों वाली दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के मतदान में हिस्सा नहीं लेने से किसी भी उम्मीदवार को आवश्यक बहुमत मिलने की संभावना नहीं रह गई।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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