बाभली मामले पर सर्वोच्च न्यायालय में अगस्त में सुनवाई
नांदेड़ (महाराष्ट्र), 21 जुलाई (आईएएनएस)। महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के बीच विवाद का केंद्र बनी बाभली बैराज परियोजना पर सर्वोच्च न्यायालय में अगले महीने सुनवाई होगी।
सर्वोच्च न्यायालय ने अप्रैल 2007 में महाराष्ट्र सरकार को बाभली बैराज का निर्माण कार्य जारी रखने की अनुमति दी थी लेकिन अगले आदेश तक बैराज में 13 दरवाजे नहीं लगाने का निर्देश दिया था।
महाराष्ट्र सरकार के एक अधिकारी ने कहा, "हम गोदावरी जल विवाद न्यायाधिकरण (जीडब्ल्यूडीटी) के 1975 फैसले का सम्मान कर रहे हैं और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार पानी नहीं रोक रहे हैं।"
नांदेड़ से 80 किलोमीटर दूर बाभली बैराज का निर्माण किया जा रहा है। नादेंड़ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण का गृह जिला है।
आंध्र प्रदेश की सीमा से सात किलोमीटर दूर गोदावरी और मांजिरा नदियों के संगम पर बाभली बैराज का निर्माण हो रहा है।
बैराज की भंडारण क्षमता 27.5 लाख क्यूबिक फुट है। इससे आसपास के 58 गांवों की पेयजल की जरूरतों और 7,995 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई आवश्यकता को पूरा किया जाएगा।
बैराज की कुल लागत करीब 22.1 अरब रुपये है और राज्य अब तक 16 अरब रुपये खर्च कर चुका है।
चव्हाण ने सोमवार को कहा कि बैराज का करीब 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। बैराज के दरवाजों के संचालन के विद्युतीकरण, एक जेनरेटर कक्ष और निरीक्षण चौकियों के निर्माण जैसे छोटे काम अभी चल रहे हैं।
आंध्र प्रदेश का दावा है कि बाभली परियोजना का निर्माण तेलंगाना क्षेत्र में स्थित पोचमपद बांध के पीछे किया जा रहा है। इसे अक्टूबर 1975 के जीडब्ल्यूडीटी समझौते का उल्लंघन बताते हुए उसने बैराज निर्माण को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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