वस्तुओं पर 20 प्रतिशत तक जीएसटी, जरूरी चीजों पर कम कर (लीड-1)
सरकार ने अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था के अंतर्गत जीएसटी लागू करने के पहले साल त्रिस्तरीय कर संरचना का प्रस्ताव दिया है। इस व्यवस्था के अंतर्गत जरूरी सामानों पर जीएसटी की दर छह प्रतिशत, अन्य वस्तुओं पर 10 और सेवाओं पर आठ प्रतिशत रखने का प्रस्ताव है। इसी तरीके से राज्य सरकारें भी कर लगाएंगी। इस तरह विभिन्न वस्तुओं पर लगने वाला कुल कर 20 फीसदी तक पहुंच जाएगा।
बाद में हालांकि इन त्रिस्तरीय दरों को चरणबद्ध तरीके से एक समान स्तर पर लाया जाएगा।
उन्होंने कहा, "हम जीएसटी के अंतर्गत वस्तुओं पर त्रिस्तरीय कर संरचना के प्रस्ताव पर सहमत हुए हैं। जीएसटी लागू होने के पहले साल (2011) सीजीएसटी (केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर) में जरूरी वस्तुओं पर छह प्रतिशत और मानक दर 10 प्रतिशत रखने का प्रस्ताव है।"
प्रदेशों के वित्त मंत्रियों के अधिकारिक समूह की बैठक में मुखर्जी ने कहा, "सेवाओं पर कर की दर आठ प्रतिशत रहेगी।"
देश के उद्योग समूह केंद्र और राज्य के करों में एकरूपता की मांग करते रहे हैं। वर्तमान में कई मामलों में कर की दर 30 प्रतिशत तक है इससे बड़े पैमाने पर कर चोरी होती है।
केंद्र और राज्यों के बीच प्रारंभिक सहमति बनने पर अब प्रदेश वस्तु एवं सेवा कर (एसजीएसटी) और सीजीएसटी की दर एक समान हो सकती है।
जीएसटी के लागू होने के बाद दूसरे साल में एसजीएसटी और सीजीएसटी की मानक उच्च दर को घटाकर नौ प्रतिशत किया जाएगा और निम्न दर को छह प्रतिशत पर ही रखा जाएगा।
इसके बाद तीसरे साल में प्रदेश और केंद्र दोनों के जीएसटी के अंतर्गत वस्तु एवं सेवाओं पर कर की सभी दरों को आठ प्रतिशत किया जाएगा।
मुखर्जी ने कहा, "चरणबद्ध तरीके से हम सीजीएसटी और एसजीएसटी के अंतर्गत वस्तुओं और सेवाओं पर करों की दर में समानता लाएंगे।"
मौजूदा कर संरचना में करों से छूट पाने वाली 99 वस्तुओं को सीजीएसटी और एसजीएसटी में भी कर दायरे से बाहर रखा जाएगा।
वित्त मंत्री ने कहा कि यदि राज्यों को राजस्व में किसी तरह का नुकसान होता है तो 14वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुरूप इसका भुगतान किया जाएगा।
कर संग्रह का नया तंत्र लागू होने के बाद केंद्र और राज्यों के उत्पाद कर, वैट और सेवा कर जैसे सभी कर जीएसटी में शामिल कर लिए जाएंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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