कृष्णा ने पिल्लै की टिप्पणी के समय पर अफसोस जताया
कृष्णा ने समाचार चैनल सीएनएन-आईबीएन के साथ एक साक्षात्कार में कहा, "पिल्लै कोई बयान जारी करने से पहले मेरी वापसी का इंतजार कर सकते थे। शायद यह ज्यादा अच्छा होता कि वह बयान मेरे दौरे के दरम्यान न दिया गया होता।"
ज्ञात हो कि कृष्णा ने पहली बार पिल्लै से अपनी नाराजगी को सार्वजनिक किया है।
ज्ञात हो कि पिल्लै ने कहा था कि 28 नवंबर, 2008 को हुए मुंबई हमले की योजना, शुरू से अंत तक आईएसआई ने बनाई थी।
कृष्णा ने कहा, "जब मुंबई हमले के बाद दोनों विदेश मंत्री मुलाकात कर रहे हैं, तो इस मुलाकात का एक विशेष महत्व था।"
कृष्णा ने कहा, "जिन लोगों को इस बात की जानकारी थी कि भारत सरकार के अंदर क्या कुछ घट रहा था, उन्हें यह पता होना चाहिए कि भारत की ओर से बातचीत का अनुकूल माहौल तैयार किया जाना चाहिए, लेकिन दुर्भाग्यवश यह घटना घट गई।"
कृष्णा से जब पूछा गया कि क्या पिल्लै की टिप्पणी को लेकर अपने असंतोष के बारे में उन्होंने प्रधानमंत्री को अवगत कराया, उन्होंने कहा, "जी हां, प्रधानमंत्री के साथ मेरी कुछ चर्चा हुई थी।"
इस्लामाबाद में कृष्णा के साथ 15 जुलाई की बातचीत के बाद एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में जब एक पत्रकार ने पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी से हाफिज सईद के खिलाफ पाकिस्तान की कार्रवाई के बारे में पूछा तो कुरैशी ने कहा था कि भारतीय गृह सचिव द्वारा की गई टिप्पणी बेहतर संबंधों के लिए मददगार नहीं है।
अगले दिन कृष्णा ने नई दिल्ली में संवाददाताओं से कहा था कि सईद और पिल्लै के बीच कोई तुलना नहीं है, क्योंकि सईद भारत के खिलाफ जिहाद छेड़ने की बात कर रहा है।
बहरहाल, कृष्णा द्वारा पिल्लै की आलोचना ने पाकिस्तान के साथ आदान-प्रदान को लेकर सरकार के भीतर वैचारिक मतभेदों को उजागर कर दिया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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