सैंथिया रेल दुर्घटना के पीछे प्रशासन की लापरवाही के संकेत
सैंथिया (पश्चिम बंगाल), 21 जुलाई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के सैंथिया में हुई त्रासदपूर्ण रेल दुर्घटना के दो दिनों बाद प्रत्यक्षदर्शियों और रेलवे के कनिष्ठ एवं पूर्व कर्मचारियों के बयानों से संकेत मिल रहे हैं कि यह दुर्घटना रेल प्रशासन की लापरवाही के कारण घटी है।
बुधवार को आईएएनएस के साथ बात करने वाले अधिकांश लोगों ने इन अनियमितताओं और सोमवार तड़के दुर्घटना के बाद अधिकारियों द्वारा दी गई विरोधाभासी सूचनाओं के बारे में खुल कर बताया। बीरभूम जिले का सैंथिया कस्बा कोलकाता से 190 किलोमीटर दूर स्थित है।
दुर्घटना के समय के बारे में अभी तक कोई स्पष्टता नहीं है। जैसे ही दुर्घटना की पहली खबर आई, रेलवे के एक प्रवक्ता ने उत्तर बंगा एक्सप्रेस और वनांचल एक्सप्रेस के बीच टकराव का समय रात 2.15 बजे बताया जबकि सैंथिया स्टेशन की कार्य पंजिका में दुर्घटना का समय रात 1.57 बजे दर्ज है। लेकिन गदाघरपुर स्टेशन, जहां उत्तर बंगा अनियमित तौर पर रुकी हुई थी, के रिकॉर्ड में कहा गया है कि उसे 1.55 पर प्रस्थान का संकेत दे दिया गया था।
अब अधिकारियों का कहना है कि उत्तर बंगा जैसी रेलगाड़ी के लिए यह बिल्कुल संभव नहीं है कि वह गदाघरपुर और सैंथिया स्टेशनों के बीच 7.14 किलोमीटर की दूरी मात्र दो मिनट में तय कर ले।
सैंथिया स्टेशन पर चाय की दुकान चलाने वाले संतोष पाल ने आईएएनएस को बताया, "वास्तव में वनांचल एक्सप्रेस पांच घंटे 32 मिनट विलंब से चल रही थी और वह सैंथिया स्टेशन पर रात 1.52 बजे पहुंची थी। उसे प्लेटफार्म नंबर 4 पर मोड़ दिया गया था। उसके बाद 1.57 बजे उसे प्रस्थान के लिए कहा गया था। रेलगाड़ी चली लेकिन 300 मीटर चलने के बाद रुक गई।"
राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) के सूत्रों ने कहा कि पैसेंजर रेलगाड़ियां सामानों को लादने और उतारने के लिए न केवल सैंथिया स्टेशन पर देर तक रुकतीं हैं, बल्कि देश के सभी स्टेशनों पर रुकती हैं। इसके लिए माल लादने वाले लोग रेल अधिकारियों सहित सभी संबंधित लोगों को रिश्वत देते हैं।
एक रेल कर्मचारी ने कहा, "वनांचल शायद इसलिए रुकी, क्योंकि उसकी चेन खींची गई हो। या फिर वह खुद से रुक गई हो। लेकिन ऐसा लगता है कि इस सच्चाई को छुपाने के लिए कि रेलगाड़ी चलने के थोड़ी देर बाद रुक गई थी, कार्य पंजिका में दुर्घटना का समय 1.57 बजे दर्ज किया गया।"
उसी दिन बाद में रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विवेक सहाय ने कहा कि जब उत्तर बंगा एक्सप्रेस ने वनांचल एक्सप्रेस को पीछे से टक्कर मारी, उस समय रात 2.01 बजे का समय था।
आईएएनएस के इस संवाददाता ने पाया कि सैंथिया और पास के सभी स्टेशनों पर उपस्थित दुर्घटना से संबंधित कार्य पंजिकाएं जब्त कर ली गई थीं और स्टेशन अधिकारियों को नई कार्य पंजिकाएं मुहैया करा दी गई थीं।
यहां एक दूसरी कहानी भी चर्चा में है। यह कि उत्तर बंगा एक्सप्रेस के चालक और सहायक चालक नशे में थे और बेहोशी की हालत में थे।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि नशे वाली कहानी का कोई अंतिम निष्कर्ष पोस्टमार्टम और विसरा रिपोर्ट आने के बाद ही निकल पाएगा। अधिकारी ने कहा, "अभी हमें पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं मिल पाई है। विसरा रिपोर्ट हमें एक सप्ताह बाद ही मिल सकती है। इस रिपोर्ट से हम इस बारे में अंतिम निष्कर्ष पर पहुंच सकेंगे।"
पुलिस अधिकारी ने कहा, "जो लोग यह दावा कर रहे हैं कि चालक नशे में थे, उन्हें अपने दावे के पक्ष में सबूत भी पेश करने चाहिए। लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई सबूत नहीं सामने आया है। इसलिए सबसे अच्छी बात यह होगी कि ऐसे में इस तरह के बेबुनियाद आरोप न लगाए जाएं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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