भारतीय कर्ज से 14 विकास परियोजनाएं शुरू करेगा बांग्लादेश (लीड-1)
इन परियोजनाओं से पूर्वोत्तर भारत और बांग्लादेश के बीच विकास गतिविधियां बढ़ने से दोनों देशों को लाभ होगा।
जनवरी में प्रधानमंत्री शेख हसीना की नई दिल्ली यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने रेलवे आधारभूत संरचना, ब्रॉडगेज रेल पटरी, यात्री कोच और नदियों की गाद निकालने जैसी विविध परियोजनाओं को एक अरब डॉलर का कर्ज देने की घोषणा की थी।
'डेली स्टार' समाचार पत्र के मुताबिक बांग्लादेश के अधिकारियों ने मंगलवार को कहा कि ढाका के अधिकारियों ने इस एक अरब डॉलर के कर्ज के उपयोग के लिए 29 परियोजनाएं प्रस्तुत की थीं। भारत ने इनमें से 14 परियोजनाओं के कार्यान्वयन की मंजूरी दी है।
इन परियोजनाओं में से ज्यादातर बांग्लादेश में रेलवे का विकास करने के लिए हैं।
अधिकारियों ने इन प्रस्तावों को योजना मंत्रालय की मंजूरी के लिए भेज दिया है। मंत्रालय की मंजूरी के बाद दोनों देशों के वित्त मंत्रालय परियोजनाओं के लिए कर्ज के समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। ये परियोजनाएं निम्नलिखित हैं:
-बांग्लादेश नदियों से गाद निकालने के लिए 7.1 करोड़ डॉलर की लागत से छह उच्च क्षमता वाले पोत खरीदेगा।
-आशुगंज में 3.62 करोड़ डॉलर की लागत से आंतरिक कंटेनर बंदरगाह स्थापित किया जाएगा। बांग्लादेश और भारत ने बांग्लादेश के आशुगंज और भारत के सिलघाट को बंदरगाह के रूप में विकसित करने का समझौता किया था।
- बांग्लादेश को 3.5 करोड़ डॉलर की लागत से रेलवे के लिए 10 लोकोमोटिव इंजन उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही बांग्लादेश 5.3 करोड़ डॉलर की लागत से 125 ब्रॉड गेज यात्री कोच खरीदेगा।
-भारत 12 करोड़ डॉलर की लागत से टाइटस नदी पर रेलवे पुल का निर्माण करेगा।
-सड़क परिवहन के विकास के लिए बांग्लादेश तीन करोड़ डॉलर की लागत से 300 दो मंजिला बसें और 60 लाख डॉलर की लागत से 50 लक्जरी बसें खरीदेगा।
- बांग्लादेश में 15 करोड़ डॉलर की लागत से बिजली की ग्रिड लाइन डाली जाएगी। इसके तहत भारत के बहरामपुर और बांग्लादेश के बहेरामारा के बीच 400 केवी की लाइन डाली जाएगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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