बांग्लादेश में संविधान समीक्षा की तैयारी
मुख्य विपक्षी बांग्लादेश नेशलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने सर्वदलीय समिति से बाहर रहने का फैसला किया है। बीएनपी ने मंगलवार को यह फैसला किया और सरकार विरोधी रुख को जारी रखने की घोषणा की।
बीएनपी प्रमुख खालिदा जिया ने इस निर्णय से पहले कानूनी और संवैधानिक विशेषज्ञों से परामर्श किया।
सत्तारूढ़ अवामी लीग के मुख्य सचेतक अब्दुस शाहिद ने समाचार पत्र 'न्यू एज' से कहा कि बीएनपी के लिए एक स्थान खाली रखा जाएगा।
बांग्लादेश का संविधान वर्ष 1972 में बना। राष्ट्रवाद, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद इसके बुनियादी सिद्धांत थे।
बांग्लादेश के संस्थापक नेता शेख मुजीबुर रहमान की हत्या और वर्ष 1975 से 90 के बीच सैनिक नेतृत्व वाली सरकारों के दौर में समाजवाद शब्द को हटा दिया और एक घोषणा के द्वारा धर्मनिरपेक्ष देश के स्थान पर बांग्लादेश को इस्लामी गणराज्य घोषित कर दिया गया।
प्रधानमंत्री शेख हसीना 18 सदस्यों की समिति की घोषणा करेंगी। समिति पिछले 38 वर्षो के दौरान हुए सभी संविधान संशोधनों की समीक्षा करेगी।
सैयद साजेदा चौधरी इस समिति के अध्यक्ष होंगे। वह अवामी लीग के सभापतिमंडल में शामिल हैं। अन्य सदस्यों में विदेश मंत्री दीपू मोनी और अब्दुर रज्जाक तथा तोफेल अहमद सहित स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा ले चुके लोग शामिल हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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