ऐतिहासिक सम्मेलन के लिए तैयार काबुल

माना जा रहा है कि सम्मेलन में राष्ट्रपति हामिद करज़ई इस बात की मांग करेंगे कि देश के पुनर्निर्माण के लिए दी जा रही मदद पर उनका नियंत्रण और बढ़ाया जाए. हालांकि अफ़गानिस्तान का समर्थन करने वाले देश भी चाहते हैं कि सैनिकों की वापसी से पहले उन्हें भी स्थायित्व का आश्वासन मिले.
काबुल सम्मेलन के बाद जनवरी महीने में लंदन में दाता देशों की एक बैठक होगी. काबुल में पिछले तीन दशकों में पहली बार इतनी बड़ी अंतरराष्ट्रीय बैठक हो रही है. सम्मेलन से पहले काबुल में सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत कड़ी कर दी गई है और सोमवार से ही चेकिंग शुरु हो गई है. पिछले कुछ महीनों में अफ़गानिस्तान और ख़ासकर काबुल में कई आत्मघाती हमले हुए हैं.
पिछले महीने काबुल में एक राष्ट्रीय शांति जिरगा का आयोजन हुआ था.जिरगा का उदघाटन राष्ट्रपति करज़ई कर रहे थे और इसी दौरान मिसाईल हमले हुए थे. इस घटना के बाद देश के खुफ़िया विभाग के प्रमुख गृह मंत्री ने इस्तीफ़ा दे दिया था.
सुरक्षा बनाम विकास
गृह मंत्रालय के प्रवक्ता जेमाराइ बशरे ने इसी हफ़्ते रायटर्स संवाद समिति से कहा था, ''हम सौ प्रतिशत तैयार हैं लेकिन हम ये नहीं कह सकते कि सबकुछ योजनाबद्ध तरीके से हो जाएगा.""
इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान कि मून भी शामिल होने वाले हैं और माना जाता है कि वो राष्ट्रपति करज़ई से अफ़गानिस्ता के लिए एक 'ठोस योजना" पेश करने की गुज़ारिश करेंगे.
मून ने एएफपी संवाद समिति से बातचीत में कहा, ''हम राष्ट्रपति करज़ई से बार बार आग्रह करते रहे हैं कि वो बेहतर प्रशासन मुहैया कराएं.ख़ासकर भ्रष्टाचार पर नियंत्रण करने की और कोशिश करें.""
ऐसी उम्मीद की जा रही है कि सरकार विकास कार्यक्रमों, प्रशासन को सुधारने, क़ानून व्यवस्था को व्यापक करने, मानवाधिकार को समर्थन दिलाने, शांति प्रयासों और मदद के पैसों को प्रभावी तरीके से बांटने की पूरी योजना पेश करेगी. योजना के तहत सेना और पुलिस की संख्या बढ़ाई जाएगी जबकि पूर्व में लड़ाके रहे लोगों को सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ा जाएगा.
इसके बदले में अफ़गानिस्तान की सरकार अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह करेगी कि दो साल में देश के लिए मिलने वाली अंतरराष्ट्रीय मदद का 50 प्रतिशत हिस्से पर उन्हें नियंत्रण दिया जाए.
हालांकि यह दाता सम्मेलन नहीं है लेकिन फिर भी कई देशों ने अफ़गानिस्तान के लिए और मदद की घोषणा की है. ब्रिटेन ने कहा है कि वो अफ़गानिस्तान में परियोजनाओं पर 40 प्रतिशत व्यय बढ़ाएगा.
अफ़गानिस्तान को 2001 से लेकर अब तक क़रीब 36 अरब डॉलर यानी प्रति व्यक्ति 1200 डॉलर की सहायता मिली है. बीबीसी के अंतरराष्ट्रीय विकास रिपोर्टर डेविड लॉयन का कहना है कि इस सहायता के कम ही हिस्से का प्रभाव पडा है.












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