भारत-पाक के बीच गतिरोध के पीछे कयानी?

मनीष चंद

नई दिल्ली, 17 जुलाई (आईएएनएस)। पाकिस्तानी सेना प्रमुख, जनरल अशफाक परवेज कयानी ने भारत-पाकिस्तान के बीच 15 जुलाई की शाम बातचीत शुरू होने से कुछ घंटे पहले अपराह्न् में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी से मुलाकात की थी। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच पैदा हुए ताजा गतिरोध के पीछे कयानी की यह मुलाकात ही रही है।

दोनों देशों के बीच दो दिनों की तू- तू मैं-मैं के बाद सरकार के करीबी सूत्रों ने कहा है कि गुरुवार की बातचीत के दौरान पाकिस्तान का जो अड़ियल रवैया सामने आया और जिसके कारण बातचीत बगैर किसी ठोस आकार लिए भविष्य पर टाल दी गई, उससे जाहिर है कि इसके पीछे पाकिस्तानी सेना का हाथ रहा है। वैसे भी इस बात की व्यापक तौर पर मान्यता है कि पाकिस्तानी सेना इस्लामाबाद में सत्ता का वास्तविक केंद्र होती है।

सूत्रों ने कहा कि यद्यपि दोनों नेताओं से कयानी की मुलाकात का मकसद हाल के आस्ट्रेलिया दौरे और देश की सुरक्षा हालात के बारे में जानकारी देना था, लेकिन जरदारी और गिलानी के साथ कयानी की मुलाकात के दौरान भारत-पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों की वार्ता पर प्रमुखता से चर्चा हुई थी।

दोनों विदेश मंत्रियों की मुलाकात काफी महत्वपूर्ण हो गई थी, क्योंकि दोनों पक्षों ने सुबह भारतीय विदेश मंत्री, एस.एम.कृष्णा और पाकिस्तानी विदेश मंत्री, शाह महमूद कुरैशी के बीच बातचीत को लेकर आशावादी रुख जाहिर किया था। जब बातचीत को विस्तार देने का निर्णय लिया गया तो इसे बातचीत में कुछ प्रगति के संकेत के रूप में देखा गया था।

सूत्रों ने कहा कि विदेश सचिवों और गृह मंत्रियों की बातचीत की तैयारी प्रक्रिया में दोनों पक्ष मछुआरों और कैदियों की अदला-बदली, व्यापार और कश्मीर में नियंत्रण रेखा के आरपार लोगों के बीच संपर्क जैसे विश्वास बहाली के उपायों (सीबीएम) पर सहमत हुए थे। बातचीत के अंत में इन सीबीएम को घोषित किए जाने की योजना थी।

लेकिन स्थिति तब बिगड़नी शुरू हुई, जब दोनों पक्ष शाम को बातचीत के लिए बैठे। इस्लामाबाद ने कश्मीर का मुद्दा उठाया और भारत के वृहद दृष्टिकोण के खिलाफ समग्र बातचीत की बहाली पर जोर देने लगा।

सूत्रों ने कहा कि बातचीत उस समय अवरुद्ध हो गई, जब पाकिस्तानी पक्ष ने हिमालय में सियाचिन ग्लेशियर और गुजरात में सर क्रीक जैसे विवादास्पद सीमा संबंधी मुद्दों को नवंबर तक हल करने की समय सीमा तय करने के लिए कहा।

कृष्णा ने शुक्रवार को इस्लामाबाद से लौटने के बाद यहां कहा, "मुझे नहीं पता कि इन समस्याओं के समयबद्ध समाधान के पीछे कुरैशी का क्या मतलब था। इन मुद्दों की जटिलता को देखते हुए कोई समय सीमा की बात करना समझदारी नहीं होगी।"

देश के पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और पाकिस्तान में भारतीय उच्चायुक्त रह चुके सतीश चंद्रा का कहना है, "बातचीत को अवरुद्ध करने के पीछे निश्चित रूप से पाकिस्तानी सेना का हाथ रहा है। विभिन्न कारणों से सेना नहीं चाहती कि बातचीत आगे बढ़े।"

चंद्रा ने आईएएनएस को बताया, "भारत के साथ खराब रिश्ते से पाकिस्तानी सेना को लाभ होता है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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