बेनतीजा रही भारत-पाक वार्ता

हालांकि भारत-पाक की इस वार्ता से दोनों देशों के संबंधों में सुधार की उम्मीद की जा रही थी मगर ये वार्ता विफल साबित हुई है। इस्लामाबाद की तीन दिवसीय यात्रा से स्वदेश लौटने के तुरंत बाद एक संवाददाता सम्मेलन में कृष्णा ने स्पष्ट किया कि पाक के साथ बातचीत के लिए उनके और विदेश सचिव के पास पूरे अधिकार थे। उल्लेखनीय है कि कुरैशी ने भारत पर वार्ता के लिए पूरी तरह से तैयार ना रहने का आरोप लगाया। कुरैशी का कहना है कि वार्ता के दौरान कृष्णा नई दिल्ली के साथ फोन पर संपर्क में थे।
वार्ता में जब कुरैशी से लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज सईद के भारत के खिलाफ नफरत भरे भाषणों के बारे में पूछा गया तो इस पर कुछ ठोस जवाब देने की बजाय कुरैशी ने केंद्रीय गृह सचिव जी. के. पिल्लै के एक बयान का हवाला दिया जिसमें मुंबई हमले के लिए पिल्लै ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई को कठघरे में खड़ा किया था।
कुरैशी के इस बयान की भारत ने कड़ी आलोचना की है। पूर्व विदेश मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने कहा कि कुरैशी विदेश मंत्री जैसे अहम पद के लायक ही नहीं हैं।












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