भोपाल गैस त्रासदी : अपील पर अगली सुनवाई 27 को

यूनियन कार्बाइड कारखाने से दो-तीन दिसम्बर 1984 की रात रिसी विषैली मिथाइल आइसो सायनाइट ने हजारों जिंदगियों को लील लिया था और लाखों को जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष की राह पर छोड़ दिया था। पिछले 25 सालों से इस त्रासदी का शिकार बने लोगों के मरने का दौर अब भी जारी है।

मालूम हो कि सीजेएम मोहन पी. तिवारी ने इस मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद सात जून को आठ आरोपियों को सजा सुनाई थी। सीजेएम द्वारा सुनाई गई सजा के खिलाफ प्रदेश सरकार ने विधि विशेषज्ञों की समिति बनाकर परामर्श किया और सेशन कोर्ट में सजा बढ़ाने के लिए अपील दायर की थी। इस अपील पर शुक्रवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से पक्ष रखा गया।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सीबीआई ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि राज्य सरकार इस मामले में जो भी मदद करना चाहती है, कर सकती है। वहीं सीबीआई ने बताया कि वह भी अपील करने की तैयारी में है। न्यायाधीश ने इस मामले की सुनवाई की अगली तारीख 27 जुलाई तय की है।

सीजेएम ने सात जून को सुनाए अपने फैसले में सात आरोपियों केशव महिन्द्रा (तत्कालीन अध्यक्ष यूसीआईएल), विजय गोखले (तत्कालीन एमडी), किशोर कामदार (तत्कालीन उपाध्यक्ष), ज़े मुकुंद (तत्कालीन श्रमिक प्रबंधक), एस. पी. चौधरी (तत्कालीन उत्पादन प्रबंधक), के. वी. शेट्टी (तत्कालीन संयंत्र नियंत्रक), एस. आई. कुरैशी (तत्कालीन उत्पादन सहयोगी) को धारा 304 ए के तहत दो-दो साल की सजा और एक-एक लाख रुपये का जुर्माना, धारा 336 के तहत 250-250 रूपए का जुर्माना तीन-तीन माह की सजा, धारा 337 के तहत 500-500 रुपये का जुर्माना व छह-छह माह की सजा और धारा 338 के तहत 1000-1000 रुपए का जुर्माना व एक-एक साल की सजा सुनाई थी। वहीं यूसीआईएल कंपनी पर कुल 5,01,750 रुपये का जुर्माना लगाया गया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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