पढ़े-लिखे लोगों का वामपंथ की ओर होता है झुकाव
समाचार पत्र 'टेलीग्राफ' के मुताबिक लाइसेस्टर विश्वविद्यालय के अध्ययनकर्ता जेम्स रॉकी कहते हैं कि ज्यादा पढ़ने लिखने वाले लोगों में रूढ़िवादी विचारों के लोगों के साथ मेल-जोल की प्रवृत्ति ज्यादा होती है।
वैसे ऊंची तनख्वाह प्राप्त करने वाले कर्मचारियों में इस बात के प्रति बेहतर जागरूकता होती है कि राजनीतिक विचारधाराओं में वे किस जगह ठीक रहेंगे।
रॉकी राजनीति को सामाजिक मानते हैं। वह कहते हैं, "दो मुख्य कारक होते हैं। पहला कारक यह है कि लोग अपनी तुलना पूरी आबादी से न करके उन लोगों से करते हैं जिन्हें वह जानते हैं। दूसरा कारक यह है कि समय के साथ राजनीतिक वरीयताएं बदलती रहती हैं।"
रॉकी की परिकल्पना के मुताबिक 80 के दशक में यदि एक ज्यादा पढ़े लिखे व्यक्ति ने अपने छात्र जीवन में वामपंथी राजनीति की है और हाल के सालों में उसका विचारधारात्मक झुकाव दक्षिणपंथ की ओर हो जाता है तो तो भी वह यही मानता है कि उसका झुकाव वामपंथ की ओर है।
यह परिकल्पना 'वर्ल्ड वेल्यूज सर्वे' (डब्ल्यूवीएस) द्वारा 136,000 लोगों पर किए गए अध्ययन के आधार पर दी गई है। अध्ययन के लिए वर्ष 1981 और 2008 के बीच पांच अवधियों में 48 देशों से आंकड़े इकट्ठे किए गए थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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