कश्मीर में शांति, सर्वदलीय बैठक में नहीं शामिल होगी पीडीपी (राउंडअप)

पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती अपने रुख पर अड़ी रहीं और सोमवार की सर्वदलीय बैठक में शामिल होने के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के आग्रह को उन्होंने ठुकरा दिया।

महबूबा ने संवाददाताओं से कहा, "मैं प्रधानमंत्री की आभारी हूं कि उन्होंने मुझे फोन किया। मैं उनका बहुत सम्मान करती हूं। उन्होंने हमें बैठक में शामिल होने की सलाह दी लेकिन इसमें शामिल होने की अपनी अक्षमता से मैंने उन्हें अवगत कराया। यह जाहिर करना मेरे लिए दुखद था।"

मनमोहन सिंह ने शनिवार रात को महबूबा से फोन करके सर्वदलीय बैठक में शामिल होने का अनुरोध किया था।

महबूबा ने कहा कि कश्मीर घाटी की स्थिति बहुत खराब है। जब तक कि कोई बड़ी पहल नहीं की जाती और कैद जैसी स्थिति में रहने वाले लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते तब तक राज्य सरकार के स्तर पर कुछ भी नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा, "मैंने प्रधानमंत्री से माफी मांग ली है। लेकिन हम उनकी ओर से बड़ी पहल का इंतजार कर रहे हैं।"

मुफ्ती ने कहा, "मैंने प्रधानमंत्री को बताया कि लोगों तक पहुंचने की जरूरत है। मुख्यमंत्री द्वारा लोगों के बीच विश्वसनीयता खोना स्वीकार करने के बाद प्रधानमंत्री को पहल करने का अधिकार है।"

उन्होंने आरोप लगाया कि उमर अब्दुल्ला की सरकार ऐसी बैठकें बुलाकर अपनी असफलताओं को छिपाना चाहती है। उन्होंने जो फैसले लिए वह नहीं लिए जाने चाहिए थे।

महबूबा ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने भी उनको फोन किया लेकिन सर्वदलीय बैठक केवल नुकसान की भरपाई करने और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की आंख में धूल झोंकने का प्रयास है।

उन्होंने कहा, "मैंने प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है और उनके समक्ष चार बिंदु भी रखे हैं। इनमें घाटी में मीडिया पर से प्रतिबंध हटाने, सेना की वापसी और राज्य सरकार द्वारा दमन रोकने की मांग की गई है।"

इस बीच रविवार को घाटी में शांति रही। यद्यपि श्रीनगर के पुराना शहर इलाके में, मैसुमा और बाटमालू में 24 घंटे की ढील के बाद फिर से कर्फ्यू लगा दिया गया।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, "अनंतनाग कस्बे के मुख्य बाजार इलाके में भी कर्फ्यू लगा दिया गया, वहां के अन्य इलाकों से कर्फ्यू हटा लिया गया।"

सड़कों को बैरिकेड और कंटीले तार लगाकर बंद कर दिया गया। सुरक्षा बल संवेदनशील इलाकों में गश्त लगा रहे हैं।

कानून और व्यवस्था कायम रखने के लिए दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा और काकपोरा इलाकों में भी प्रतिबंध लगाया गया है।

बारामूला के विशेष आयुक्त मुहम्मद सैयद खान ने कहा कि सोपोर कस्बे में लोगों को आवश्यक वस्तुओं की खरीद के लिए सुबह 11.00 बजे तक कर्फ्यू में ढील दी गई। कर्फ्यू में ढील के दौरान भीड़ ने बाजार में पथराव किया।

सैयद अली गिलानी के नेतृत्व वाले हुर्रियत के कट्टरवादी धड़े के बंद के आह्वान और प्रतिबंधों से श्रीनगर और अन्य कस्बों में जनजीवन पंगु हो गया। दुकानें बंद रहीं और सड़कों पर वाहन नहीं उतरे।

इस बीच मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सत्ताधारी नेशनल कांफ्रेंस (एनसी) और कांग्रेस विधायकों की एक बैठक की अध्यक्षता की। केंद्रीय नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्री फारुक अब्दुल्ला तथा कांग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज ने भी बैठक में हिस्सा लिया।

बैठक में लोगों तक पहुंचने और उनकी शिकायतों को दूर करने के तौर-तरीकों पर चर्चा की गई, ताकि हिंसा का वर्तमान दौर समाप्त हो सके।

बैठक के अंत में जारी एक बयान में कहा गया है कि एनसी और कांग्रेस विधायक दलों ने मुख्यमंत्री में अपनी पूर्ण आस्था और विश्वास जताया।

अधिकारियों ने शुक्रवार को मुस्लिम त्योहार शब-ए-मेराज के अवसर पर विशेष प्रार्थना सभाओं में लोगों को शामिल होने का मौका देने के लिए शुक्रवार शाम को पूरी कश्मीर घाटी में कर्फ्यू में ढील दी थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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