चीनी का स्थान लेगी स्टेविया !
नई दिल्ली, 11 जुलाई (आईएएनएस)। लैटिन अमेरिकी देश पराग्वे में पाई जाने वाली स्टेविया नामक जड़ी-बूटी भारत आ रही है। इसे चीनी के स्थान पर इस्तेमाल किया जा सकेगा। यह चीनी से भी अधिक मीठी है। इसे घर की छोटी बगिया में उगाया जा सकता है।
स्टेविया बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक सौरव अग्रवाल ने आईएएनएस को बताया, "यदि आपने स्टेविया को चख लिया है, तो आपको इसकी मिठास का अंदाजा होगा। स्टेविया की पत्तियों से निकाला गया सफेद रंग का पाउडर चीनी से लगभग 200 से 300 गुना अधिक मीठा होता है।"
अग्रवाल ने कहा, "यह शून्य कैलोरी स्वीटनर है और इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं है। इसे हर जगह चीनी के बदले इस्तेमाल किया जा सकता है।"
अग्रवाल ने कहा कि पराग्वे में स्टेविया को सदियों से स्वीटनर और स्वादवर्धक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
कंपनी ने देश में स्टेविया की खेती को बढ़ावा देने हेतु परियोजनाओं की मंजूरी के लिए भारतीय कृषि मंत्रालय से संबंधित विभिन्न विभागों से संपर्क किया है।
स्टेविया डॉट नेट के अनुसार, "स्टेविया का एक सफल उत्पादक बनने के लिए आपको कोई दक्षिण अमेरिकी किसान होना जरूरी नहीं है। हालांकि इस वनस्पति का मूल स्थान दक्षिण अमेरिका होने के कारण यह कुछ मामले में बाहरी लग सकती है, लेकिन यह साबित हो चुका है कि इसे किसी भी जलवायु में उगाया जा सकता है।"
अग्रवाल के अनुसार, "हमारे देश की जलवायु इस वनस्पति की खेती के लिए उपयुक्त है।" उन्होंने कहा कि स्टेविया को यहां तक कि किसी बगीचे में भी उगाया जा सकता है।
उन्होंने कहा, "इसे सहज रूप में कहीं भी उगाया जा सकता है। स्टेविया की व्यावसायिक खेती के लिए तापमान, मिट्टी की किस्म, पानी की किस्म व उसकी उपलब्धता और अच्छी गुणवत्ता वाली अधिकतम उत्पादन देने वाली स्टेविया जैसे कारक को सुनिश्चित कर लेना जरूरी होता है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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