'आयातित कल-पुर्जो के कारण नष्ट हो रहे भारतीय उपग्रह'
इसरो इसके पहले अपने दो उपग्रहों को गंवा चुका है। वर्ष 2009 में चंद्रयान और 1997 में इनसैट-2डी। इनसैट-4बी फिलहाल आंशिक रूप से खराब है।
वैश्विक संचार उपग्रह के निर्माण बाजार में अपना पैर जमाने की कोशिश कर रहे इसरो के लिए एक बड़ा झटका तब लगा था, जब यूटेलसैट कम्युनिकेशंस के लिए इसरो और ईएडीएस आस्ट्रियम द्वारा मिल कर तैयार किया गया डब्ल्यू2एम उपग्रह जनवरी में फेल हो गया था।
इसरो के एक अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर आईएएनएस को फोन पर बताया, "ऐसा लगता है कि उपग्रह की विद्युत प्रणालियों के लिए आयातित कल-पुर्जे इसके लिए जिम्मेदार हैं। चंद्रयान उपग्रह इसलिए नष्ट हुआ था, क्योंकि एक आयातित उपकरण में विद्युत की समस्या पैदा हो गई थी। ऐसा लगता है कि उपग्रहों को विद्युत आपूर्ति में इस्तेमाल किए जाने वाले आयातित कल-पुर्जे इसके लिए जिम्मेदार हैं।"
चंद्रयान उपग्रह में डीसी को डीसी में बदलने वाला कनवर्टर फेल हो गया था, परिणामस्वरूप अन्य कलपुर्जे/उपकरण गरम हो गए थे और उन्होंने काम करना बंद कर दिया था। इसके कारण इसरो को अपने मिशन को निर्धारित दो वर्ष के पहले ही रद्द करना पड़ा था।
डीसी से डीसी कनवर्टर छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में जरूरी वोल्टेज की विद्युत आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।
इसरो के एक अन्य वैज्ञानिक ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर कहा, "इस पुर्जे का आयात इसलिए किया जाता है, क्योंकि इसका आकार छोटा है। जबकि भारत में बनने वाले इस पुर्जे का आकार बड़ा होता है। अंतरिक्ष में हर अतिरिक्त ग्राम वजन महत्वपूर्ण होता है। इनसैट-4बी की समस्या हो सकता है कि डीसी से डीसी कनवर्टर से संबंधित न हो, लेकिन यह समस्या डब्ल्यू2एम उपग्रह में पैदा हुई समस्या जैसी ही है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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