लोगों की भीड़ से ताज को खतरा
आगरा, 11 जुलाई (आईएएनएस)। ताज महल में शाहजहां के उर्स पर 25 साल पहले जो तीन मीटर की चादर चढ़ाई जाती थी इस समय उसकी लंबाई बढ़कर 450 मीटर हो गई है। यहां आने वालों लोगों की संख्या दर्जन से बढ़कर करीब 100,000 तक पहुंच गई है।
तीन दिन तक चलने वाले उर्स के दौरान हजारों की तादाद में लोग ताज महल में जाते हैं। इससे देखते हुए सफेद मार्बल की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़ा हो गए हैं।
इस साल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) का मानना है कि शाहजहां के 356वें उर्स पर 100,000 लोगों के आने की संभावना है। उर्स में मुगल सम्राट शाहजहां और उनकी पत्नी मुमताज के कब्र पर सूफी तरीके से चादर चढ़ाया जाता है।
आगरा में होटल एवं रेस्तरां एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष संदीप अरोड़ा ने कहा कि एएसआई के ताजमहल पर तैनात अधिकतर कर्मचारी अस्थाई हैं उन्हें पर्यटकों पर निगरानी रखने का जिम्मा सौंपा गया है।
पर्यटन उद्योग के नेता अभिनव जैन ने कहा कि पर्यटकों के बढ़ने से वायु प्रदूषण होता है जिससे ताज को खतरा पैदा हो गया है।
पिछले साल ताज महल पर पर्यटकों और आम जनता का दबाव बढ़ गया था। इसको लेकर एएसआई की काफी आलोचना हुई थी।
संरक्षणवादियों का कहना है कि इसमें कोई संदेह नहीं कि एएसआई ने स्मारक की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम उठाए हैं, लेकिन तहखाने में लोगों के मुक्त तरीके से जाना कब्र के लिए खतरनाक हो सकता है।
ताजगंज के एक निवासी ने कहा, "यह स्पष्ट नहीं है कि शाहजहां का उर्स मनाना क्यों और कब शुरू हुआ। इसके पहले केवल मुमताज महल का उर्स मनाया जाता था।"
एक होटल व्यवसायी ने गोपनीयता की शर्त पर कहा, "केवल कुछ साल पहले ही शाहजहां की उर्स पर मामूली से लोग इकट्ठा हुए थे, लेकिन इस साल यह खत्म नहीं होने वाला है। समितियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ने के साथ ही चादर की लंबाई बढ़ती जा रही है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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