हेगड़े बन सकते थे राष्ट्रपति : आडवाणी
नई दिल्ली, 10 जुलाई (आईएएनएस)। कर्नाटक के लोकायुक्त एन. संतोष हेगड़े से संबंधित मौजूदा विवादों के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने शनिवार को कहा कि उनके पिता न्यायमूर्ति के. एस. हेगड़े 1977 में देश के राष्ट्रपति बन सकते थे।
आडवाणी ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि 1973 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने तीन वरिष्ठ न्यायमूर्तियों के. एस. हेगड़े, जे. एम. शेलट और ए. एन. ग्रोवर की वरिष्ठता को धता बताते हुए इन सबसे कनिष्ठ न्यायमूर्ति के. एन. रे को सर्वोच्च न्यायालय का प्रधान न्यायाधीश बना दिया गया था। इस घटना के बाद वह हेगड़े के काफी करीब आ गए थे।
उन्होंने कहा कि 1977 में जब पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार बनी थी तो उन्हें उस वक्त सूचना व प्रसारण मंत्री बनाया गया था।
उन्होंने कहा कि देसाई ने उस समय उनसे कुछ संवैधानिक पदों पर तैनाती के लिए उपयुक्त लोगों के बारे में सुझाव मांगा था। तब आडवाणी ने सुझाव दिया था, "बतौर पत्रकार मैंने संसद की कार्यवाही बखूबी देखी है। सदन का प्रबंधन करने के मामले में नीलम संजीव रेड्डी का कोई जवाब नहीं। रही बात राष्ट्रपति पद के लिए तो न्यायमूर्ति के. एस. हेगड़े सबसे उपयुक्त हो सकते हैं।"
आडवाणी ने ब्लॉग में लिखा, "मेरे सुझावों पर मोरारजी ने कहा कि मैं दोनों नामों पर सहमत हूं। लेकिन रेड्डी चाहते हैं कि उन्हें राष्ट्रपति बनाया जाए। कांग्रेस पार्टी के संसदीय दल द्वारा राष्ट्रपति पद के लिए उनके नाम को हरी झंडी दिए जाने के बाद भी वह हार गए थे। राष्ट्रपति बनने की उनकी उत्सुकता को मैं समझ सकता हूं।"
इस प्रकार रेड्डी को 1977 में देश का राष्ट्रपति बनाया गया जबकि हेगड़े को लोकसभा अध्यक्ष।
आडवाणी ने ब्लॉग में आगे लिखा है, "संतोष हेगड़े ने मेरे आग्रह को सहर्ष स्वीकार करते हुए अपना इस्तीफा वापस ले लिया। इसके लिए मैं उनके प्रति आभार व्यक्त करता हूं। मुझे उम्मीद है कि राज्य सरकार उनकी चिंताओं का ख्याल करेगी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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