बिहार में लगातार बंद से आम लोग त्रस्त
पिछले एक सप्ताह में चार दिन के बंद के कारण लोग परेशान रहे। बिहार में जहां 30 जून और एक जुलाई को नक्सलियों ने बंद कर रखा था वहीं पांच जुलाई को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सहित विपक्षी दलों ने भारत बंद रखा। इस बंद के एक दिन बाद ही नक्सलियों ने बुधवार और गुरुवार को बिहार सहित सात राज्यों में बंद की घोषणा की।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय जनता दल और लोक जनशक्ति पार्टी ने अगामी 10 जुलाई को महंगाई के खिलाफ बंद का आह्वान किया है।
इस बंद के कारण कई लोगों के समक्ष रोजगार की समस्या उत्पन्न हो गई है। गया के रेलवे स्टेशन पर कुली का काम करने वाले मोहम्मद अफजल बताते हैं कि नेताओं का बंद हो या नक्सलियों का, इसका सबसे ज्यादा प्रभाव तो हमलोगों पर ही पड़ता है। बंद के कारण रेलों का परिचालन लगभग ठप्प हो जाता है जिससे हम लोगों का धंधा बंद हो जाता है।
पटना के रिक्शा चालक गोविंद कहते हैं कि हमलोग प्रतिदिन कमाते-खाते हैं। जिस दिन कमाई नहीं होती है, उस दिन हम लोगों के घरों में चूल्हा भी नहीं जलता है। ऐसे में बंद हम लोगों के लिए आफत लेकर आता है।
ऐसा नहीं कि इस बंद के कारण अमीर लोग खुश रहते हैं। वे भी त्रस्त हैं। एक बड़े व्यवसायी कहते हैं कि बंद का प्रभाव सभी पर पड़ता है।
इधर, राजनीति करने वाले भी बंद को सही नहीं ठहराते। भाजपा के एक नेता ने कहा कि बंद से ऐसा नहीं है कि मंहगाई कम हो जाएगी परंतु जनता की बात को सरकार तक पहुंचाने का यही एक तरीका है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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