अंसारी ने दिया ऊर्जा सुरक्षा पर बल
लेह में लद्दाख के जियोथर्मल और अन्य ऊर्जा संसाधन प्रौद्योगिकीय और व्यवसाय वहनीयता पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि मिशन ग्रिड इंटरएक्टिव और वितरित नवीकरणीय बिजली, ग्रामीण और शहरी अनुप्रयोग तथा ऐसी नवीकरणीय बिजली के औद्योगिक एवं वाणिज्यिक अनुप्रयोगों पर बल देता है।
उन्होंने कहा कि भारत जियोथर्मल परियोजनाओं को शुरू करने वाले प्रारंभिक देशों में रहा है और वह 1970 के दशक में ही इन परियोजनाओं की स्थापना कर चुका है मगर जियोथर्मल ऊर्जा देश में नवीकरणीय ऊर्जा का महत्वपूर्ण विकल्प बनकर नहीं उभर सकी। इसके बजाय आसानी से उपलब्धता, कम प्रारंभिक निवेश और सिद्घ प्रौद्योगिकी के मद्देनज़र पवन ऊर्जा और सौर ऊर्जा को प्राथमिकता दी जा रही है।
अंसारी ने कहा कि इसके बावजूद जियोथर्मल ऊर्जा पर भी पुनर्विचार करने की जरूरत है। अनुमान है कि देश में 10 हजार मेगावाट जियोथर्मल ऊर्जा उत्पन्न करने की तकनीकी क्षमता है। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के विद्युतीकरण के मद्देनजर जियोथर्मल बिजली के प्राव के संर्दभ में और भी अधिक संभावना है, जहां 5 किलोवाट की छोटी परियोजनाएं भी आर्थिक हालात और जीवन स्तर में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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