भारत बंद (बिहार) : व्यापक असर, 9000 हिरासत में (राउंडअप)
पटना समेत राज्य के करीब सभी जिला मुख्यालयों में बंद समर्थक सुबह ही सड़कों पर निकल गए। पटना के सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठान तथा शिक्षण संस्थान बंद रहे।
पटना, मुजफ्फरपुर, गया, मुंगेर, मोतिहारी, बेगूसराय, आरा समेत राज्य के लगभग सभी क्षेत्रों में बंद समर्थकों ने रेल और सड़क जाम कर आवागमन बाधित कर दिया। बांका, हाजीपुर, सासाराम, बाढ़, गुलजारबाग तथा आरा में भी बंद समर्थकों ने रेल पटरी जाम कर दी। इसका रेलों के परिचालन पर व्यापक प्रभाव देखा गया।
इधर, गया, बेगूसराय, जहानाबाद, शेखपुरा, भागलपुर, पूर्णिया तथा मुंगेर में कई स्थानों पर राष्ट्रीय राजमार्ग समेत कई मुख्य सड़क मार्ग भी बंद समर्थकों द्वारा बाधित कर दिया गया। सड़क और रेल मार्ग बाधित होने से यात्रियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
राज्य के पुलिस महानिदेशक नीलमणि ने बताया कि बंद के दौरान चार बजे तक 8,519 लोगों को हिरासत में लिया गया। इस दौरान कहीं से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।
पुलिस के अनुसार हिरासत में लिए गए लोगों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष सी़ पी़ ठाकुर, पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, किरण घई जनता दल (युनाइटेड) के शिवानंद तिवारी, प्रदेश अध्यक्ष विजय चौधरी समेत कई विधायक और सांसद शामिल थे।
इस दौरान भाजपा समर्थकों द्वारा गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के पोस्टर के साथ प्रदर्शन करने पर पटना एवं भागलपुर में भाजपा और जदयू समर्थकों के बीच झड़प भी हुई।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सी़ पी़ ठाकुर ने जहां बंद को पूरी तरह सफल बताते हुए इसमें आम लोगों का समर्थन मिलने की बात कही, वहीं राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद ने इसे सरकारी बंद बताया। उन्होंने कहा कि बंद करवाने में प्रशासन के लोग भी लगे रहे।
बंद को लेकर राज्यभर में सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए थे। गौरतलब है कि 10 जुलाई को राष्ट्रीय जनता दल और लोक जनशक्ति पार्टी ने भी बिहार बंद का आह्वान किया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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