क्वात्रोकी मामला बंद करने पर सुनवाई स्थगित
मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट कावेरी बावेजा ने केस के दस्तावेज सर्वोच्च न्यायालय के पास होने के कारण मामले की अगली सुनवाई सात अगस्त तक स्थगित कर दी।
सीबीआई की तरफ से पेश हुए अतिरिक्ट सॉलिसिटर जनरल पी.पी.मल्होत्रा ने अदालत को बताया कि सर्वोच्च न्यायालय में एक आवेदन देकर केस के दस्तावेजों को सत्र न्यायालय में भेजने के बारे में निर्देश मांगा गया है।
इस मामले पर सर्वोच्च न्यायालय में 13 जुलाई को सुनवाई होने की संभावना है।
सीबीआई के फैसले पर आपत्ति करते हुए न्यायालय के सामने एक आवेदन देने वाले वकील अजय अग्रवाल ने दावा किया कि केस के मूल दस्तावेज एक अन्य मामले के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय को भेजे गए थे, इसमें कुछ आरोपियों को दिल्ली उच्च न्यायालय ने बरी किया था।
उन्होंने कहा कि सीबीआई आरोपियों से मिलकर काम कर रही है और उसने क्वात्रोकी के खिलाफ मामले को वापस लेने की अनावश्यक जल्दबाजी की जबकि अन्य आरोपियों के मामले सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष लंबित पड़े हैं।
उच्च न्यायालय द्वारा 31 मई 2005 को अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला खारिज करने के बाद क्वात्रोकी मामले का एकमात्र जीवित आरोपी है। वह कभी भी किसी भारतीय अदालत के सामने पेश नहीं हुआ।
सीबीआई दो मौकों-वर्ष 2003 में मलेशिया और वर्ष 2007 में आर्जेटीना से क्वात्रोकी का प्रत्यर्पण कराने में विफल रही।
घूसखोरी का मामला 1980 के दशक में स्वीडन की कंपनी बोफोर्स एबी के भारत को 155 मिलीमीटर तोपों की आपूर्ति के सौदे को हासिल करने से जुड़ा हुआ है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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