भारत बंद : वाम दलों ने अभूतपूर्व बताया
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), फारवर्ड ब्लाक और रिवल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) के महासचिवों द्वारा हस्ताक्षरित एक संयुक्त बयान में कहा गया है, "हजारों प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी और हिरासत के बावजूद देश के सभी हिस्सों में बंद जैसी स्थिति रही। दुकानें, व्यापारिक प्रतिष्ठान, परिवहन और शिक्षा संस्थान बंद रहे।"
माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य सीताराम येचुरी ने दावा किया कि सोमवार को बंद के दौरान जनता स्वत:स्फूर्त सड़कों पर उतर आई और उसने बंद का समर्थन किया। येचुरी ने आईएएनएस कहा, "वामपंथी दल तथा अन्य धर्मनिरपेक्ष दल साथ बैठकर आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे।"
उन्होंने कहा कि मानसून सत्र के दौरान इस मुद्दे को संसद में जोरशोर से उठाया जाएगा। येचुरी ने कहा, "यदि मूल्य वृद्धि वापस नहीं हुई तो यह मुद्दा संसद में गूंजेगा।"
येचुरी ने इस तर्क को खारिज कर दिया कि वामपंथी और भाजपा एकजुट होकर इस मुद्दे पर कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ लड़ रहे हैं।
येचुरी ने कहा, "पहले हमने बंद का आह्वान किया था और उसके बाद भाजपा ने बंद का ऐलान किया। हम (वामपंथी और धर्मनिरपेक्ष पार्टियां) अलग से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।"
माकपा महासचिव प्रकाश करात ने एक टेलीविजन चैनल से बातचीत में कहा, "इस बंद की गति को आगे भी जारी रखनी है। आने वाले संसद सत्र में यह सबसे अहम मुद्दा होगा।"
करात ने उन खबरों का भी खंडन किया जिसमें कहा जा रहा था कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य बंद के खिलाफ थे।
इधर, ए.बी.बर्धन, डी.राजा और बृंदा करात जैसे वामपंथी नेताओं को दिल्ली में धरना देते समय गिरफ्तार कर लिया गया।
बंद को पूर्ण सफल बनाने के लिए जनता और कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए वामपंथी पार्टियों ने कहा है, "इस कार्रवाई के जरिए जनता ने पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में वृद्धि के जरिए लोगों पर लगातार बोझ डाल रहीं जनविरोधी नीतियों के खिलाफ अपनी नाराजगी और कड़ा विरोध जाहिर कर दिया है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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