2 अरब से ज्यादा शल्य चिकित्सा सुविधाओं से मेहरूम
'हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ पॉलिसी एंड मेनेजमेंट' के शोधकर्ता ल्यूक फंक कहते हैं, "हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि उच्च-आय क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति ऑपरेशन थियेटरों की संख्या कम-आय क्षेत्रों की तुलना में 10 गुना से अधिक होती है।"
अध्ययन बताता है कि हर साल अनुमानित 23.4 करोड़ शल्य चिकित्साएं होती हैं और ये सुविधाएं हासिल करने वालों में वैश्विक आबादी के एक तिहाई धनी लोगों का 75 प्रतिशत होता है जबकि एक तिहाई गरीबों में से केवल चार प्रतिशत लोग ही ये सुविधाएं ले पाते हैं।
नतीजे बताते हैं कि उच्च-आय क्षेत्रों में प्रति 100,000 लोगों की आबादी पर कम से कम 14 ऑपरेशन थियेटर होते हैं। इसके विपरीत कम-आय क्षेत्रों में प्रति 100,000 लोगों की आबादी पर दो से भी कम ऑपरेशन थियेटर होते हैं जबकि इन लोगों में ऐसी बीमारियां ज्यादा होती हैं जिनमें शल्य चिकित्सा की जरूरत होती है।
फंक और उनके साथी शोधकर्ता अतुल गवांडे ने इस शोध के लिए 92 देशों के 769 अस्पतालों की जानकारियां इकट्ठी की थीं।
शोधकर्ताओं ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की पहल 'सेफ सर्जरी सेफ लाइव्स' में हिस्सा लिया है। डब्ल्यूएचओ के इस कार्यक्रम का मकसद शल्य चिकित्सा से होने वाली मौतों की संख्या में कमी लाना है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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