भारत बंद के लिए विपक्षी दलों ने कमर कसी

जनता की इस नब्ज को भांपते हुए समूचा विपक्ष एकजुट हो गया है और उसने इसके विरोध में सोमवार को भारत बंद का एलान भी किया है। बंद से ठीक एक दिन पहले विपक्ष ने इस आयोजन को सफल और ऐतिहासिक बनाने के लिए रणनीति तैयार की तो उधर सरकार ने उसे विफल करने के लिए विज्ञापन का सहारा लिया और जनता को मजबूरी समझाई।

अब सोमवार को देखना यह है कि आम आदमी किसकी सुनता है। महंगाई की मार उसे सड़कों पर उतारती है या फिर सरकार की उस मजबूरी को वह समझता है जिसे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी और पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा लोगों को गिना रहे हैं।

सोमवार को आयोजित बंद के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के वरिष्ठ नेताओं ने रविवार को रणनीति बनाने के लिए बैठक की।

बैठक के बाद उसकी ओर से जारी एक बयान में कहा गया, "देश के लोगों के खिलाफ कांग्रेस और केद्र सरकार द्वारा इस पूर्व नियोजित षडयंत्र को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जनता की समस्याओं से बेपरवाह कुंभकर्णी नींद सो रही सरकार को जगाने के लिए लोगों को सड़कों पर आना चाहिए और बंद का सफल बनाना चाहिए।"

राजग ने कहा कि सभी विचारधारा वाले विपक्षी दल ईंधन कीमतों में वृद्धि के केंद्र सरकार के फैसले का पूरी ताकत से विरोध करें और इस फैसले को वापस लेने की मांग करें।

राजग में शामिल घटक दलों के अलावा वामपंथी दलों तथा बीजू जनता दल (बीजद), राष्ट्रीय जनता दल (राजद), लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा), ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके), तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) व अन्य प्रमुख राजनीतिक दलों ने भी सोमवार को ही बंद की घोषणा की है।

मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने महंगाई के लिए सीधे तौर पर सरकार को जिम्मेदार ठहराया है और मूल्य वृद्धि वापस न लेने के सरकार के फैसले की उसने कड़ी आलोचना भी है। पार्टी पोलित ब्यूरो ने एक बयान में कहा कि यह बंद सरकार के लिए एक चेतावनी है। इसके बाद भी वह नहीं जागी तो वामपंथी दल आंदोलन करने से भी नहीं चूकेंगे।

विपक्षी दलों द्वारा सोमवार को बंद की घोषणा के मद्देनजर सरकार ने रविवार को कहा कि हड़ताल समस्या का समाधान नहीं है। विज्ञापन के जरिए सरकार जनता को यह समझाने में लगी है कि मूल्य वृद्धि किन मजबूरियों में लिया गया है। विज्ञापन में यह भी दर्शाया गया है कि पड़ोसी देशों के मुकाबले हमारे देश में पेट्रोल, डीजल, केरोसीन और गैस बहुत सस्ते हैं।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा समाचार पत्रों में प्रकाशित कराए गए एक विज्ञापन में कहा गया है कि "भारत बंद समस्या का समाधान नहीं है।"

विज्ञापन में कहा गया है कि कीमतों में वृद्धि के बाद भी सरकार को 53,000 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान हो रहा है और देश की 80 प्रतिशत ईंधन जरूरत की आपूर्ति विदेशों से पेट्रोलियम के आयात पर निर्भर है।

विज्ञापन में कहा गया, "अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण घरेलू बाजार में दाम प्रभावित होते हैं।"

सरकार ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय कीमतों के अनुसार रसोई गैस की कीमतों में 261 रुपये की वृद्धि की जरूरत है, लेकिन सरकार ने केवल 35 रुपये प्रति सिलेंडर की वृद्धि की है।

इसमें कहा गया कि तेल का आयात करने वाले सभी देशों में रसोई गैस और केरोसीन की कीमतें भारत में सबसे कम हैं।

पाकिस्तान में गैस सिलेंडर की कीमत 577 रुपये, बांग्लादेश में 537 रुपये, श्रीलंका में 822 रुपये और नेपाल में 782 रुपये है जबकि भारत में इसकी कीमत केवल 345 रुपये है।

इसी तरह पाकिस्तान में केरोसीन की कीमत 35.97 रुपये प्रति लीटर, बांग्लादेश में 29 रुपये प्रति लीटर, श्रीलंका में 21 रुपये प्रति लीटर और नेपाल में 39 रुपये प्रतिलीटर है जबकि भारत में इसकी कीमत 12.32 रुपये प्रति लीटर है।

विज्ञापन में कहा गया कि जब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 147 रुपये प्रति बैरल पर पहुंच गई थीं तब भी सरकार ने सामान्य दाम पर ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित की थी।

विज्ञापन में कहा गया कि आज चुकाई जा रही छोटी सी कीमत कल के लिए बड़ा फायदा बनेगी।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पहले ही कह चुके हैं कि वह विपक्षी दलों के विचार से अवगत हैं लेकिन लोग यह कदम उठाने के पीछे सरकार की मजबूरी को समझेंगे।

केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने रविवार को कोलकाता में कहा कि ईंधन कीमतों में हुई वृद्धि वापस लेने की सरकार की कोई योजना नहीं है। "कीमत वृद्धि के फैसले को वापस लेने का कोई प्रश्न ही नहीं है।"

मुखर्जी की अध्यक्षता में 25 जून को मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह की बैठक में पेट्रोल की कीमतों से सरकारी नियंत्रण हटाने का फैसला लिया गया था। इसके अलावा डीजल के दाम दो रुपये प्रति लीटर, केरोसीन के दाम तीन रुपये प्रति लीटर और रसोई गैस के दाम 35 रुपये प्रति सिलेंडर बढ़ाने का निर्णय लिया गया था। पेट्रोल से सब्सिडी हटने से इसके दाम में 3.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो गई थी।

इंडो-एशियन न्यूज सविस।

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