वर्ष 2014 में होगी राजग की सत्ता में वापसी : गडकरी

नई दिल्ली, 4 जुलाई (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष नितिन गडकरी को भरोसा है कि उनकी पार्टी के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) वर्ष 2014 के संसदीय चुनाव में सत्ता में लौटेगा।

उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) द्वारा निर्देशित होने से इंकार किया और कहा कि बिहार का गठबंधन संकट करीब-करीब समाप्त हो गया है।

गडकरी को नहीं लगता कि देश पर वर्ष 1998 से 2004 तक राज करने वाला राजग, बीजू जनता दल (बीजद) और इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के बाहर निकलने के बाद से कमजोर हुआ है।

भाजपा मुख्यालय में आईएएनएस को दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में गडकरी ने आईएएनएस से कहा कि यह प्रक्रिया चलती रहती है। कुछ पार्टियां बाहर जा सकती हैं लेकिन अन्य पार्टियां भाजपा में शामिल होने की इच्छुक हैं।

क्या वह राजग में शामिल होने की इच्छुक पार्टियों का नाम बता सकते हैं? इस सवाल पर गडकरी ने कहा कि वह उपयुक्त समय पर इसका खुलासा करेंगे।

छह महीने पहले अध्यक्ष पद संभालने वाले 53 वर्षीय गडकरी ने जोर दिया कि जब से उन्होंने पद संभाला है तब से पूरे देश में भाजपा कार्यकर्ता सक्रिय हुए हैं। गडकरी ने भाजपा के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह की जगह ली है।

गडकरी ने कहा, "पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है। राजग केंद्र में सत्ता में वापसी करेगा।"

उन्होंने कहा कि भारत बंद के लिए सभी विपक्षी दलों का एकजुट होना उनके छोटे से कार्यकाल की बड़ी उपलब्धि है। "आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के मुद्दे पर हम सभी पार्टियों को एकजुट करने में सक्षम हुए।"

जनता दल (युनाइटेड) के साथ मतभेद और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव तथा राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के खिलाफ अशोभनीय टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर गडकरी ने कहा, "वे अतीत की बातें हैं। वह समय बीत चुका है।"

भाजपा अध्यक्ष ने दोनों नेताओं को 'भौंकने वाले कुत्तों' की संज्ञा दी थी जो कथित तौर पर सरकार के प्रति नरम हो जाते हैं।

गडकरी अक्टूबर में होने वाले बिहार विधानसभा चुनावों की चुनौती को लेकर भी उत्साहित हैं।

भाजपा और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच मतभेद के बारे में उन्होंने कहा कि संकट करीब-करीब समाप्त हो चुका है।

गठबंधन की चुनावी संभावना के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "हमारी जीत की संभावना शत प्रतिशत है।"

उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के साथ कोई समस्या होने से साफ इंकार किया। "मेरा आडवाणीजी या किसी भी वरिष्ठ या कनिष्ठ नेता के साथ कोई विवाद नहीं है।"

क्या राष्ट्रीय स्तर पर अनुभवहीनता उनके लिए कोई समस्या है? इस सवाल पर उन्होंने कहा, "मेरे विचार से मीडिया के एक तबके ने ऐसी धारणा फैलाई है। वास्तविकता के बजाय यह उनकी अपनी धारणा है।"

आरएसएस का रिमोट कंट्रोल बनने से इंकार करते हुए उन्होंने कहा, "निश्चय ही संघ मेरी आस्था का हिस्सा है और मेरा अतीत है। परंतु मैं आरएसएस से निर्देशित हूं यह सच से दूर है।"

उनके अनुसार पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह को पार्टी में वापस लाने का फैसला उनका खुद का था।

क्या मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती भी पार्टी में वापसी की राह पर हैं? गडकरी ने कहा कि पार्टी इस मुद्दे पर उपयुक्त समय पर चर्चा करेगी और उपयुक्त फैसला करेगी।

क्या मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उमा भारती की वापसी का विरोध कर रहे हैं? गडकरी इस सवाल को टाल गए।

गडकरी ने दावा किया कि भाजपा में आंतरिक झगड़े और गुटबाजी खत्म होने की ओर है। "राजस्थान में असंतोष का बड़ा उदाहरण दिया जाता था लेकिन हमने राज्यसभा में राम जेठमलानी की आसान जीत हासिल की। इसी तरह कर्नाटक में असंतोष समाप्त होने की राह पर है और बिहार इकाई में कोई असंतोष नहीं है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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