नक्सली नेता आजाद का शव हैदराबाद लाया जाएगा (लीड-1)
आजाद, प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) में नंबर दो का दर्जा रखता था। वह संगठन का प्रवक्ता भी था। आजाद को शुक्रवार को हैदराबाद से लगभग 300 किलोमीटर दूर आदिलाबाद जिले में जोगापुर के निकट जंगल में मार गिराया गया था। एक अन्य नक्सली सहदेव को भी मार गिराया गया था।
कड़ी सुरक्षा के बीच पुलिस शव को हैदराबाद ला रही है, जहां शव को पारिवारिक सदस्यों को सौंपा जाएगा। अंतिम संस्कार यहां रविवार को किया जाएगा।
इसके पहले फोरेंसिक विशेषज्ञों के दल ने आजाद और सहदेव के शव का आदिलाबाद के मचरियाल कस्बे में सरकारी अस्पताल में पोस्टमार्टम किया।
पोस्टमार्टम के पहले पुलिस ने उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेशानुसार आजाद की मां सी. करुणा और भाई सी. सुरेश को शव के निरीक्षण की अनुमति दी। लेकिन पुलिस ने बालादीर गदर, लेखक वरवरा राव और नक्सली समर्थकों को अस्पताल में दाखिल होने से रोक दिया। परिणामस्वरूप वहां तनाव की स्थिति पैदा हो गई।
परिवार के अन्य सदस्यों और वरवरा राव के साथ विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता भी अस्पताल पहुंचे, जहां आजाद और सहदेव के शवों को पोस्टमार्टम के लिए लाया गया था।
अधिकारियों द्वारा आजाद की मां और भाई के अलावा किसी अन्य को अस्पताल के अंदर प्रवेश करने की इजाजत न देने की वजह से पुलिस और मानवाधिकार संगठनों के कार्यकर्ताओं के बीच गरमागरम बहस हुई।
मीडियाकर्मियों ने भी अस्पताल परिसर में दाखिल होने की अनुमति न मिलने पर पुलिस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
शोकाकुल करुणा ने अस्पताल के बाहर आने के बाद संवाददाताओं को बताया, "मैंने अपने बेटे को 30 वर्ष से अधिक समय से नहीं देखा था और जब मैंने उसे देखा तो वह जीवित नहीं था।"
अस्पताल के बाहर गदर ने संवाददाताओं को बताया, "सरकार ने एक ऐसे व्यक्ति की हत्या की है जो शांति वार्ताओं में शामिल था। इससे पता चलता है कि सरकार की दिलचस्पी शांति में नहीं है।" नक्सली समर्थकों का आरोप है कि पुलिस ने आजाद को महाराष्ट्र से पकड़ने के बाद उसकी बेरहमी से हत्या की है।
गदर ने चेतावनी दी है कि फर्जी मुठभेड़ में नक्सली नेता की हत्या केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ एक जन क्रांति को जन्म देगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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