पाकिस्तान में महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा

अनीसा अजमल
बीबीसी उर्दू संवाददाता, इस्लामाबाद
एक ग़ैर सरकारी संस्था औरत फाऊँडेशन के अनुसार पाकिस्तान में महिलाओं के ख़िलाफ हिंसक घटनाओं में 2008 की तुमना में 2009 में 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी.
औरत फाऊँडेशन ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट इस्लामाबाद में जारी करते हुए डॉक्टर रख़शिंदा परवीन ने बताया कि 2008 में महिलाओं के ख़िलाफ हिंसा की घटनाएँ 7571 रिपोर्ट की गई थीं जबकि 2009 में 8548 घटनाएँ रिपोर्ट हुई हैं.
उन्होंने कहा कि बहुत सारे ऐसे मामले हैं जिनमें महिलाएं डर की वजह से रिपोर्ट नहीं करती हैं.
रिपोर्ट के अनुसार 2008 की तुलना में इस साल सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी घरेलू हिंसा की घटनाओं में हुइ हैं जो 116 प्रतिशत है. इसी तरह तेज़ाब फ़ेंकने के मामलों में 82 प्रतिशत और इज़्ज़त के नाम पर हत्या के मामले में 27 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है.
रिपोर्ट में बताया गया है कि महिलाओँ की हत्या और आग से झुलसने के मामले में मामूली कमी हुई है.
पाकिस्तान में जो महिलाएँ हिंसा का ज़्यादा निशाना बन रही हैं उनमें 43 प्रतिशत शादीशुदा और 40 प्रतिशत ग़ैर-शादी शुदा हैं.
रिपोर्ट में बताया गया है कि जिन शहरों में हिंसा की घटनाएँ सब से अधिक हुई हैं उनमें लाहौर, फ़ैसलाबाद और सरघोधा शामिल हैं.
महिलाओं के अधिकारों के लिए काम करने वाली कार्यकर्ता ताहिरा अब्दुल्लाह ने बताया कि जब तक समाज में जिर्गा और क़बायली तंत्र ख़त्म नहीं होते तब तक हिंसा की घटनाएँ होती रहेंगी.
उनके अनुसार देश में हिंसा के ख़िलाफ़ क़ानून बनाए तो जाते हैं लेकिन उनपर अमल नहीं किया जा रहा है.
रिपोर्ट के मुताबिक़ एक अच्छी बात यह सामने आई है कि मज़बूत मीडिया की वजह से महिलाओं के ख़िलाफ़ जो ज़ुल्म समाने आते हैं तो महिलाओं को मदद मिल पाती है जिसकी वजह से घटनाओं की रिपोर्ट सामनें आ रही हैं.
औरत फाऊँडेशन की डॉक्टर रख़शिंदा परवीन ने बताया कि चारों प्रांतों और इस्लामाबाद से आँकड़े इकट्ठे कर रिपोर्ट तैयार की गई है.
रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा के जो मामले सामने आए हैं उनमें 66 प्रतिशत केवल पंजाब प्रांत में दर्ज हुए हैं.
इसी तरह सिंध में 20 प्रतिशत, ख़ैबर पख़्तूख़्वा में आठ और बलूचिस्तान में तीन प्रतिशत जबकि इस्लामाबाद में दो प्रतिशत मामले दर्ज हुए हैं.












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