संयुक्त राष्ट्र समिति पर श्रीलंका चिंतित

श्रीलंका सरकार ने संयुक्त राष्ट्र पर आरोप लगाया है कि वो गुप्त एजेंडा के तहत काम कर रहा है.
सयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने श्रीलंका में मानवाधिकार हनन मामलों की रिपोर्टें का अध्ययन करने के लिए एक सलाहकारी पैनल की घोषणा की है. श्रीलंका सरकार ने इस पर चिंता जताई है.
श्रीलंका में आरोप लगते रहे हैं कि संघर्ष के दौरान तमिल विद्रोहियों और श्रीलंका सेना दोनों ने मानवाधिकारों का उल्लंघन किया.
लेकिन श्रीलंका सरकार आरोप से इनकार करती रही है. सरकार का कहना है कि इन मामलों की जाँच करने के लिए उसका अपना जाँच दल पर्याप्त है.
श्रीलंका में मीडिया मामलों के मंत्री कहेलिया रामबुकवाला ने एक स्थानीय वेबसाइट को बताया, “श्रीलंका सरकार इस बात को लेकर चिंतित है कि एक ‘बाहरी’ व्यक्ति होने के बावजूद बान की मून ने मानवाधिकार मामलों से जुड़ा पैनल नियुक्त किया है. जबकि मेलमिलाप और सुलह-सफ़ाई के लिए सरकार हाल ही में अपना एक पैनल नियुक्त कर चुकी है.”
मंत्री ने कहा कि सरकार इस बारे में उचित कदम उठाएगी.
सलाहकारी पैनल
बान की मून ने जिस पैनल का गठन किया है कि उसकी अध्यक्षता इंडोनेशिया के पूर्व अटॉर्नी जनरल मारज़ुकी दारुसमन कर रहे हैं.
कुछ समय पहले एक अंतरराष्ट्रीय दल का गठन किया गया था जिसका मकसद श्रीलंका में कथित प्रताड़नों के मामलों का अध्ययन करना था. मारज़ुकी दारुसमन इस दल में भी शामिल थे. हालांकि इस समिति ने बाद में इस्तीफ़ा दे दिया था.
संयुक्त राष्ट्र का नया पैनल एक सलाहकारी समिति है और ये जाँच करने के मकसद से गठित नहीं किया गया है.
बान की मून के प्रवक्ता के अनुसार तीन सदस्यों वाला ये सलाहकारी पैनल इस बात को लेकर सलाह देगा कि कथित रूप से हनन करने वालों के साथ कैसे निपटा जाए.जिस पैनल की नियुक्ति श्रीलंका सरकार ने की है कि उसके पास भी सीमित अधिकार है.
श्रीलंका में पिछले 37 वर्षों से चल रहा संघर्ष पिछले साल मई में तमिल विद्रोहियों की हार के साथ ख़त्म हुआ है.
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि युद्ध के आख़िरी पांच महीनों में करीब सात हज़ार आम नागरिक मारे गए.












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