गैस त्रासदी : मंत्री समूह की सिफारिशों से पीड़ितों को संतोष
दिल्ली में मंत्री समूह की चार दिन तक चली बैठक सोमवार को खत्म हो गई। इस समिति ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपनी सिफारिशें सौंप दी। सिफारिशों में दो-तीन दिसम्बर 1984 को यूनियन कार्बाइड से रिसी जहरीली गैस से पीड़ित लोगों को राहत देने की बात कही गई है।
इसमें मृतकों के आश्रितों को 10-10 लाख रुपये, पूरी तरह विकलांग हुए लोगों को पांच-पांच लाख रुपये और आंशिकरूप से विकलांग हुए लोगों को तीन-तीन लाख रुपये तक की राशि तथा स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी राशि देने का जिक्र किया गया है।
गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन के संयोजक अब्दुल जब्बार ने कहा है कि मंत्री समूह की सिफारिशों का वह स्वागत करते हैं, मगर पूर्व में दी गई राशि की कटौती किसी भी सूरत में पीड़ितों के पक्ष मे नहीं कहा जाएगा।
इसी तरह भोपाल ग्रुप फॉर इंन्फार्मेशन एण्ड एक्शन के सती नाथ षाडंगी ने भी इन सिफारिशों का स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि पीड़ितों को राहत राशि देने की सिफारिश ठीक है मगर किसको कितना मिलेगा यह साफ नहीं किया गया है। इसमें स्थाई पुनर्वास की कोई चर्चा नहीं है। इतना ही नहीं सक्षम आयोग गठित करने की कोई बात नहीं कही गई है।
भोपाल गैस पीड़ित संघर्ष सहयोग समिति की साधना कार्णिक ने सिफारिशों को पीड़ितों के साथ छलावा बताया है। उन्होंने कहा है कि सिफारिशों में मृतकों के आश्रितों को 10-10 लाख का मुआवजा देने की बात इसलिए कही गई है क्योंकि इनकी संख्या कम है। वहीं तीन-तीन लाख रुपये जिन्हें दिए जाने हैं वे वास्तविक प्रभावित ही नहीं है। इतना ही नहीं जिन्हें गैस पीड़ित नहीं माना गया है वे एक बार फिर लाभ से वंचित रह जाएंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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