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जीओएम ने की राहत पैकेज और एंडरसन के प्रत्यर्पण की सिफारिश (राउंडअप)

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सोमवार को सौंपी गई इस रिपोर्ट में हादसे से जुड़े सभी पहलुओं पर गौर किया गया। रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के लिए हुई बैठक के बाद पत्रकारों से चर्चा में चिदंबरम ने कहा, "हमने सभी मुद्दों पर गौर किया है। इनमें मुआवजा, कानूनी मसले, वारेन एंडरसन का प्रत्यर्पण और भारत सरकार के पास मौजूद कानूनी विकल्प भी शामिल है।"

उन्होंने कहा, "रिपोर्ट पर कैबिनेट में विचार किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने मुझे कल (रविवार) संकेत दिए थे कि जीओएम की रिपोर्ट पर विचार करने लिए वह शुक्रवार को कैबिनेट की विशेष बैठक बुलाएंगे।"

चिदंबरम ने कहा, "जीओएम ने महत्वपूर्ण रूप से सुधारात्मक पहलुओं, स्वास्थ्य और स्वास्थ्य से जुड़े मसलों पर अपनी सिफारिशें की हैं।"

सूत्रों ने आईएएनएस से बताया कि जीओएम ने त्रासदी में मारे गए लोगों के परिजनों 10-10 लाख रुपये, पूरी तरह विकलांग हुए लोगों को पांच-पांच लाख रुपये और आंशिक रूप से विकलांग हुए लोगों को तीन-तीन लाख रुपये मुआवजे के तौर पर दिए जाने की सिफारिश की है।

सूत्र के मुताबिक जीओएम ने मुआवजे के रूप में 1500 करोड़ रुपये दिए जाने की सिफारिश की है।

"हमारा फोकस पीड़ितों और प्रभावितों को राहत दिलाना है। अभी भी हजारों लोग हैं, जो प्रभावित हैं। मैं समझता हूं कि हमने महत्वपूर्ण सिफारिशें की हैं।"

इससे पहले, रविवार को हुई जीओएम की बैठक में सर्वोच्च न्यायालय में समीक्षा याचिका दायर करने की सिफारिश करने का फैसला किया गया था। इसमें अभियुक्तों पर आपराधिक जवाबदेही तय करने पर जोर रहेगा।

दो-तीन दिसंबर 1984 को भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड संयंत्र से तकरीबन 40 टन मिथाइल आइसोसायनाइट गैस रिसी थी जिससे तीन हजार लोगों की उसी रात मौत हो गई थी और इस हादसे में करीब 20, 000 लोगों ने दम तोड़ दिया था।

मंत्री समूह ने यूनियन कार्बाइड संयंत्र स्थल की सफाई का प्रस्ताव भी दिया है। सफाई का जिम्मा मध्यप्रदेश सरकार की होगी। इस कार्य में केंद्र सरकार वित्तीय और तकनीकी मदद देगी।

सूत्र ने कहा कि इसका मतलब यह हुआ कि यूनियन कार्बाइड को 2001 में खरीदने वाली कंपनी डाउ केमिकल्स को संयंत्र की सफाई कार्य से मुक्त रखा गया है। इस कार्य पर 300 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

इससे पहले मंत्री समूह की शनिवार को हुई बैठक में गैस त्रासदी से संबंधित सभी वैधानिक मुद्दों और कानूनी विकल्पों पर विचार किया गया और संभावित निष्कर्ष पर पहुंचने की कोशिश की गई थी।

मंत्री समूह में स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद, कानून मंत्री वीरप्पा मोइली, शहरी विकास मंत्री जयपाल रेड्डी, सड़क एवं परिवहन मंत्री कमल नाथ, पर्यटन मंत्री कुमारी शैलजा, रसायन एवं उर्वरक मंत्री एम. के. अलागिरी, प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री पृथ्वीराज चव्हाण और पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश शामिल हैं।

उल्लेखनीय है कि भोपाल गैस त्रासदी में 25 साल बाद सात जून को भोपाल की अदालत ने फैसला सुनाते हुए सात आरोपियों को दो-दो साल की सजा सुनाई थी। आरोपियों को तुरंत जमानत मिल गई थी। इसे लेकर देश में तीखी प्रतिक्रिया हुई थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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