एंडरसन पर कांग्रेस और विपक्षी दलों में तलवारें खिंची (राउंडअप)
एक दिन पहले यानी मंगलवार को पूर्व अमेरिकी राजनयिक गोर्डन स्ट्रीब ने आईएएनएस से बातचीत में कहा था कि सरकार ने एंडरसन के लिए देश से बाहर जाने का सुरक्षित रास्ता मुहैया करवाया था। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने भी राजनयिक के इस बयान को संगत बताया है।
भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "यह तो शुरुआत से ही स्पष्ट था कि इस मामले में कुछ गड़बड़ी हुई है। भोपाल गैस हादसा गैर जमानती अपराध है। मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री और देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री इसके लिए जिम्मदार हैं। एंडरसन को देश से बाहर भेलने में उच्च स्तर पर सरकार की संलिप्तता थी।"
माकपा ने भी कहा कि सरकार ने एंडरसन को देश से बाहर जाने के लिए सुरक्षित रास्ता दिया।
माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य एम. के. पंधे ने कहा, "समस्या यह है कि वह अब भारत नहीं आ सकेगा। क्या उसे फरार होने के लिए सुरक्षित रास्ता नहीं दिया गया था।" उन्होंने कहा, "सरकार के समर्थन के बिना यह कैसे हो सकता है।"
स्ट्रीब के मुताबिक एंडरसन ने भारत सरकार के समक्ष भोपाल जाकर गैस त्रासदी में मारे गए लोगों के पीड़ितों के प्रति अपनी चिंता जताने की इच्छा जताई थी। भारत सरकार ने एंडरसन की इच्छा का सम्मान करते हुए उसे सुरक्षित स्वदेश भेजने का वादा किया था।
पंधे ने कहा, "विदेशी राजनयिक ने जो बयान दिया है, मैं समझता हूं कि वह असंगत नहीं है। मैं मानता हूं कि यह सही है।"
एंडरसन अब 89 वर्ष का हो चुका है और वह अमेरिका में रह रहा है।
विपक्षी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा, "यह पूरी तरह बकवास है। हम इसे सिरे से खारिज करते हैं।"
उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार की हमेशा यही मंशा रही है कि कोई भी अपराधी भाग न पाए। यह मामला मंत्रियों के समूह के अधीन है। वह पूरे मामले को देख रहा है।"
उधर, भोपाल गैस त्रासदी के समय शहर के हनुमानगंज क्षेत्र के थाना प्रभारी रहे और वर्तमान में अनुसूचित जाति व जनजाति कल्याण शाखा (अजाक्स) के पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र सिंह ठाकुर ने बुधवार को कहा कि एंडरसन को प्रशासनिक दबाव में छोड़ा गया था।
भोपाल गैस त्रासदी पर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी का फैसला आने के 10 दिन बाद मीडिया के सामने आए सुरेंद्र सिंह ने एक निजी चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा है कि दो-तीन दिसम्बर 1984 को हुए गैस रिसाव में हजारों लोग मारे गए थे।
इस मामले में शुरुआत में रख-रखाव में लापरवाही बरतने पर धारा 304 ए के तहत विधि सम्मत मामला दर्ज किया गया था। बाद में जांच में आए तथ्यों के आधार पर धारा 304 बी को जोड़ा गया था।
एंडरसन को गिरफ्तारी के कुछ ही देर बाद छोड़े जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह सब प्रशासनिक दबाव या यूं कहें कि यह प्रशासनिक कार्रवाई के क्रम में हुआ था। उन्होंने आगे कहा कि गिरफ्तारी के बाद एंडरसन को भोपाल में रखा जाना ठीक नहीं था क्योंकि हर तरफ तनाव और लोगों में आक्रोश था।
एंडरसन को जमानत के लिए न्यायालय में पेश किए जाने की बजाय थाने से ही छोड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह सिर्फ प्रशासनिक दबाव था।
ठाकुर ने हादसे की रात का जिक्र करते हुए बताया कि पुराने भोपाल के कई इलाकों में सिर्फ कोहरा सा नजर आ रहा था और लोग बदहवास भागे जा रहे थे। वह वाकया आज भी उनकी आंखों के सामने उभर आता है। महिलाएं अपने बच्चों को लिए भागे जा रही थी। किसी के चार में से दो बच्चे उसके साथ थे तो दो की उसे खबर ही न थी।
इससे पहले एंडरसन को भगाने में मदद करने का आरोप लगाते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह सहित चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए बुधवार को एक और परिवाद दायर किया गया। इस तरह गैस त्रासदी पर न्यायालय का फैसला आने के बाद अब तक चार परिवाद दायर किए जा चुके हैं। इन परिवादों में छह लोगों पर मामला दर्ज करने की अपील की गई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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