बीटी कपास के मुकाबले सामान्य कपास में मुनाफा ज्यादा
हैदराबाद, 15 जून (आईएएनएस)। ग्रीनपीस इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट के मुताबिक बीटी कपास के मुकाबले सामान्य कपास उगाना किसानों के लिए ज्यादा फायदेमंद है।
रिपोर्ट में कहा गया, "वर्ष 2009-10 में सामान्य कपास उगाने वाले किसानों ने जेनेटिक इंजीनियरिंग से निर्मित बीटी काटन के मुकाबले 200 प्रतिशत ज्यादा मुनाफा कमाया है।"
'सामान्य और जेनेटिक कपास में चुनाव' नामक शीर्षक से की गई इस रिपोर्ट में आंध्रप्रदेश में दोनों तरह की कपास उगाने वाले किसानों की कमाई का तुलनात्मक अध्ययन किया गया है।
ग्रीनपीस इंटरनेशनल के वैज्ञानिक और शोधकर्ता रेयस टिराडो ने कहा, "हमारी रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ है कि जेनेटिक इंजीनियरिंग वाली कपास उगाने वाले किसान भारी कर्ज में डूबे हैं क्योंकि उनकी लागत बहुत ज्यादा होती है इससे आर्थिक रूप से उनकी हालत बहुत खराब हो चुकी है।"
रिपोर्ट में कहा गया है कि बीटी कपास उगाने वाले किसान 26 अलग-अलग तरह के कीटनाशकों का उपयोग कर रहे हैं, और बीज की भारी कीमत के चलते वह कर्ज में डूब रहे हैं।
आंध्रप्रदेश में बीटी कपास उगाने वाले किसानों की लागत बहुत ज्यादा है।
रिपोर्ट में कहा गया कि वर्ष 2008-09 और 2009-10 में बीटी कपास उगाने वाले किसानों पर सामान्य कपास उगाने वाले किसानों की तुलना में 65 प्रतिशत ज्यादा कर्ज था।
वर्ष 2008 में केंद्र सरकार ने यहां के कर्ज में डूबे किसानों को राहत देने के लिए 20 हजार करोड़ रुपये का राहत पैकेज दिया था।
रिपोर्ट जारी करने के अवसर पर मौजूद सेंटर फॉर सव्सटेंशियल एग्रीकल्चर के कार्यकारी निदेशक जी. वी. रामानजानेयालु ने कहा, "यह बहुत अजीब है कि एक ओर सरकार किसानों को राहत देने के लिए हजारों करोड़ रुपये खर्च कर रही है और दूसरी ओर बीटी कॉटन जैसी महंगी खेती को बढ़ावा देकर किसानों को कर्ज में डूबने के लिए छोड़ रही है।
ग्रीनपीस इंडिया के एग्रीकल्चर कैंपेनर राजेश कृष्णन ने कहा, "बीटी कॉटन से केवल मोंसेंटो जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को मुनाफा हो रहा है जो अपने पेटेंट किए हुए बीजों से अब तक 1,500 करोड़ रुपये की रॉयल्टी कमा चुकी है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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