जल-भुन कर राख हो जाते हैं एक फोन पर!
बेंगलुरू। आईटी कंपनी में काम करने वाले कानपुर के मूल निवासी रितेश त्रिपाठी के मोबाइल की घंटी बजी। दोपहर के तीन बजे थे, फोन था उनके मित्र का जो लखनऊ में रहते हैं। कुछ देर बातचीत के बाद उनके मित्र ने कहा, "भाई यहां गर्मी से हाल बेहाल है।" रितेश ने जवाब दिया, "अरे यहां तो मौसम इतना ठंडा है कि हम सुबह जैकट पहन कर ऑफिस जाते हैं और रात को कभी कभी तो कंबल ओढ़ना पड़ता है।" बस फिर क्या था गर्मी से बेहाल मित्र के तन बदन में आग लग गई। बातों ही बातों में वो जल भुन कर राख हो गए...
आप सोच रहे होंगे यह सब क्या है? सच पूछिए तो ऐसा रोज होता है। गर्मी, सर्दी, बरसात हर मौसम में ऐसा होता है। यह कमाल है तो सिर्फ बेंगलुरू के मौसम का जो सदाबहार ठंडा रहता है। उत्तर भारत में लोग इस शहर को 'एयरकंडीशंड शहर' भी कहते हैं। यहां रहने वाले उत्तर भारतीय लोग जब भी अपने नेटिव प्लेस पर किसी से फोन पर बात करते हैं, तो 80 फीसदी कॉल्स में मौसम का जिक्र जरूर होता है।
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इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि मई-जून के महीने में जब दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पंजाब और मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी पड़ती है, तब यहां हलकी बारिश के साथ ठंडी हवाएं चलने लगती हैं। दिन भले ही थोड़ा गर्म हो, लेकिन रोज शाम इतनी ठंडी होती है, कि लोगों को कई बार जैकट तक पहनने पड़ते हैं।
अब अगर दिसंबर-जनवरी की बात करें तो भी फोन कॉल का आलम कुछ ऐसा ही रहता है। फर्क इतना होता है कि कॉल के एक छोर पर दिल्ली, भोपाल, लखनऊ में बैठे लोग जैकेट-स्वेटर व दस्तानों से पैक होते हैं, और दूसरे छोर पर हाफ शर्ट पहन कर घूम रहे होते हैं। तब भी जब फोन पर मौसम की बात होती है, तो बेंगलुरू में रहने वाले व्यक्ति की बात सुनकर लोग जल जाते हैं। तब ज्यादातर लोग यही कहते हैं, "मौज करो भाई हम ता यहां ठंड से मरे जा रहे हैं।"
खैर मौसम को लेकर जलन की यह भावना ज्यादा समय तक नहीं रहने वाली, क्योंकि विकास के पथ पर अग्रसर बेंगलुरू अपनी असली प्रकृति खोता जा रहा है। ग्रीन सिटी के नाम से जाना जाने वाला बेंगलुरू भी अब पहले जितना ठंडा नहीं होता। पिछले पांच वर्षों से बढ़ते प्रदूषण का असर यहां के मौसम पर दिखने लगा है। जानकारों के मुताबिक आने वाले वर्षों बेंगलुरू भी अन्य शहरों की तरह गर्म हो सकता है।












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