जलवायु परिवर्तन के मसले पर फिर दरार के आसार
जयदीप गुप्ता
बॉन, 10 जून (आईएएनएस)। जलवायु परिवर्तन के मसले पर उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों और अन्य विकासशील देशों के बीच यहां 31 मई से 11 जून तक जारी बातचीत में फिर से दरार की स्थिति उत्पन्न हो गई है। यह वार्ता मेक्सिको में होने वाले जलवायु परिवर्तन सम्मेलन की तैयारी के लिए हो रही थी।
यहां मामला यह है कि विश्व के तापमान की वृद्धि की सीमा दो डिग्री से घटाकर 1.5 डिग्री तक सीमित रखने की सूरत में जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र प्रारूप समझौता (यूएनएफसीसीसी)सचिवालय ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती सुझाए या नहीं।
बार्बाडोस की अगुवाई वाले लघु द्वीपीय राष्ट्रों के संघ (एओएसआईएस)को समुद्र का जलस्तर बढ़ने से सबसे ज्यादा खतरा है। जलवायु परिवर्तन से खेती की उपज भी घट रही है और इसकी वजह से सूखा, बाढ़ और तूफान ज्यादा आने लगे हैं और इनकी तीव्रता भी बढ़ गई है।
यह संघ अल्प विकसित देशों का समूह है और वह मांग कर रहा है कि विश्व का तापमान दो डिग्री की बजाए 1.5 डिग्री पर स्थिर रखा जाए। जबकि कोपेनहेगन समझौते में 127 देशों ने इसे दो डिग्री रखने की बात कही थी।
दूसरी ओर भारत और चीन जैसे उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों को आशंका है कि अगर यह वृद्धि घटाई गई तो ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में इतनी ज्यादा कटौती की जरूरत पड़ेगी कि विकसित देश इन्हें नाकाफी बताते हुए विकासशील देशों पर ज्यादा कानूनी तौर पर वैध संधियों पर दस्तखत के लिए दबाव डालेगी।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल के एक सदस्य ने आईएएनएस को बताया, "हम अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं। वह कानूनी तौर वैध कटौती सीमा के लिए राजी नहीं होंगे। लेकिन विकसित देश हमें घेरने की कोशिश में हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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