टिकाऊ शहरी परिवहन परियोजना पर कार्यशाला

कार्यशाला में संयुक्त राष्ट्र रेजिडेंट कर्डिनेटर एंड रेजिडेंट रिप्रेजेंटेटिव यूएनडीपी, विश्व बैंक के कंट्री निदेशक पैट्रिक कोयुर-बिजट, डा. राबटरे जधा और राज्यों के शहरों तथा संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।

देश में शहरी परिवहन का जन-केंद्रित, टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल माध्यम विकसित करने के लिए शहरी विकास मंत्रालय टिकाऊ शहरी परिवहन परियोजना पर कार्य कर रहा है। यह परियोजना वैश्विक पर्यावरणीय सुविधा तथा विश्व बैंक की सहायता से कार्यान्वित की जा रही है।

पिम्परी-चिंचवाड़ और पुणे (महाराष्ट्र), इंदौर (मध्य प्रदेश), नया रायपुर (छत्तीसगढ़) और मैसूर (कर्नाटक) में प्रदर्शन के तौर पर परियोजनाएं पहले ही शुरू की जा चुकी हैं।

तीव्र शहरीकरण तथा उसके फलस्वरूप वाहनों के इस्तेमाल में वृद्धि के कारण देश में वाहनों की भीड़ बढ़ गई है। इससे वायु प्रदूषण बढ़ा है, यातायात दुर्घटनाएं बढ़ी हैं, पैदल चलने वालों के लिए जोखिम बढ़ा है तथा ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन बढ़ा है।

इन सबको देखते हुए राष्ट्रीय शहरी परिवहन नीति में समुचित बदलावों पर ध्यान केंद्रित करने के मकसद से भारत सरकार ने देश में टिकाऊ परिवहन परियोजना को कार्यान्वित करने का फैसला किया है।

भारत में टिकाऊ परिवहन परियोजना दो पहल के जरिए कार्यान्वित की जानी है -

पहला राष्ट्रीय स्तर पर सांस्थानिक मजबूती और क्षमता निर्माण तथा दूसरा प्रदर्शन। इस पहल में देश में विभिन्न शहरों में ग्रीन परिवहन प्रदर्शन परियोजनाओं की पहचान करने, तैयार करने और इन परियोजनाओं के पैकेज के कार्यान्वयन पर बल दिया जाएगा।

परियोजना के लिए प्रस्तावित कुल वैश्विक पर्यावरणीय सुविधा अनुदान 255़75 लाख अमरीकी डॉलर है, जिसमें विश्व बैंक से 2000 लाख अमरीकी डॉलर के साथ भारत सरकार, राज्य सरकारें और कार्यान्वयन एजेंसियां 1500 लाख अमरीकी डॉलर का योगदान देंगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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