मप्र में प्लास्टिक कचरे से चल रहे हैं सीमेंट कारखाने
नगर निगम भोपाल ने सार्थक स्वयं सेवी संस्था के साथ खोजे गए इस विकल्प से जहां राजधानी को प्लास्टिक के कचरे से मुक्ति मिलेगी, वहीं पन्नी बीनने के काम मे लगे लोगों को वैकल्पिक रोजगार भी मिल रहा है।
इतना ही नहीं पन्नी बीनने वालों के उत्थान के लिए 'रेग पिकर्स' उत्थान परियोजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत 250 पन्नी बीनने वालों को सुरक्षा की दृष्टि से टोपी, एप्रेन, जूते, दस्ताने, उपचार किट, खुरपी आदि प्रदान की गई है। इस परियोजना का मकसद नगर को प्लास्टिक कचरे से मुक्त बनाना है।
योजना के अंतर्गत सार्थक संस्था, पन्नी बीनने वालों के जरिए प्लास्टिक कचरा इकटठा करके निगम को उपलब्ध कराएगी। निगम इस कचरे को संपीड़ित कर कैमोर स्थित एसीसी, डायमंड सीमेंट दमोह, विक्रम सीमेंट नीमच, सतना सीमेंट सतना, मैहर सीमेंट , प्रिज्म सीमेंट तथा जेपी सीमेंट रीवा को उपलब्ध करा रहा है।
जानकारी के मुताबिक सीमेंट कारखाने सार्थक संस्था को तीन रुपए किलो और सार्थक संस्था के पन्नी बीनने वालों को दो रुपये किलो की दर से राशि का भुगतान कर रही है। नगर निगम की महापौर कृष्णा गौर ने कहा है कि पन्नी बीनने वालों की पर्यावरण सुरक्षा और स्वच्छता में महत्वपूर्ण भूमिका है। लिहाजा इनके आर्थिक उत्थान व पुनर्वास की बेहतर व्यवस्था की जाएगी।
जो सीमेंट कारखाने प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल कर रहे हैं वह प्लास्टिक को 1400 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पर भट्टियों में जलाकर उससे ऊर्जा उत्पन्न कर रहे हैं। इस तापमान पर प्लास्टिक कचरा जलाने से हानिकारक गैसों का उत्सर्जन नहीं होता। इस तापमान से पहले प्लास्टिक कचरा जलाना पर्यावरण के लिए खतरनाक माना जाता हैं। नगर निगम भेापाल अब तक 535 टन प्लास्टिक कचरा सीमेंट कारखानों को भेज चुका है।
नगर निगम के आयुक्त मनीष सिंह ने बताया कि पन्नी बीनने वालों को घरों से कचना इकट्ठा करने के काम में भी लगाया जाएगा जिससे उन्हें अतिरिक्त आय मिलेगी। इतना ही नहीं प्लास्टिक को संपीड़ित करने वाली चार मशीनें भी लगाई जाएंगी और भविष्य में 14 स्थानों पर कचरा संग्रहण केंद्र बनाए जाएंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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