तेजी से बढ़ेगी अर्थव्यवस्था : प्रधानमंत्री (राउंडअप)

प्रधानमंत्री ने हालांकि इसके साथ ही कहा कि बढ़ती कीमतों के चलते अगले एक साल तक सतर्कता पूर्ण नजरिए से आशावादी रहने की जरूरत है।

प्रधानमंत्री ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के दूसरे कार्यकाल के पहले साल के प्रदर्शन का रिपोर्ट कार्ड जारी करते हुए कहा, "मौजूदा वित्त वर्ष में देश की आर्थिक विकास दर 8.5 प्रतिशत हो सकती है।"

उन्होंने कहा, "दुनिया की सभी अर्थव्यवस्थाओं में यह सबसे अच्छा प्रदर्शन है, इससे कई सालों में विकसित हुई हमारी अर्थव्यवस्था की मजबूती साबित हुई है। फिलहाल विश्व में कुछ अनिश्चितताएं हैं, मैं अगले एक साल को सतर्क आशावाद के नजरिये से देखता हूं।"

प्रधानमंत्री ने कहा, "फिलहाल हमारी सबसे बड़ी समस्या कीमतों पर पड़ रहा दबाव है, यह समस्या सूखे की वजह से पैदा हुई है लेकिन इससे निपटने के लिए स्थाई प्रयासों जैसे कदमों की आवश्यकता है।"

उन्होंने इस पर जोर दिया मुद्रास्फीति से निपटने के लिए जो संभव सुधारात्मक कदम होंगे, सरकार उठाएगी।

सरकार ने लोकहितकारी नीतियों पर जोर देते हुए कहा कि इसके लिए ग्रामीण भारत पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके लिए खाद्य सुरक्षा कानून, मनरेगा, भारत निर्माण और राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की शुरुआत की चर्चा की गई।

बिना किसी धूमधाम के आयोजित एक बैठक में मंत्रिमण्डल और गठबंधन के प्रमुख नेताओं की उपस्थिति में प्रधानमंत्री ने 'जनता के लिए रिपोर्ट' नामक शीर्षक से रिपोर्ट का दस्तावेज जारी किया।

इस अवसर पर संप्रग और कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में सदन के नेता और वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी, कृषि मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार और रेल मंत्री व तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी भी मौजूद थीं।

रिपोर्ट जारी करने का यह कार्य 22 मई को गठबंधन के सभी नेताओं के साथ भोज के दौरान किया जाना था लेकिन मैंगलोर में विमान दुर्घटना के चलते इस कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने 2004 के बाद से जन हित को ध्यान में रखते हुए नीति-निर्धारण और योजनाओं को लागू किया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हम आर्थिक और सामाजिक मजबूती के नए क्षेत्रों और नई दिशाओं पर ध्यान दे रहे हैं।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासनिक उपस्थिति मजबूत की जाएगी :

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि नक्सली हिंसा की चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासनिक उपस्थिति मजबूत करने के साथ-साथ बुनियादी ढांचागत विषमाताओं को दूर किया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा, "सरकार ने नक्सलवाद की समस्या से निपटने के लिए सुरक्षा और विकास जैसे क्षेत्रों में समेकित दृष्टिकोण अपनाया।"

उन्होंने कहा, "नक्सली समस्या की चुनौती से निपटने के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों, कमांडो बटालियनों की व्यवस्था, राज्य पुलिस बलों के आधुनिकीकरण, प्रभावित राज्यों में विशेष बुनियादी ढांचा योजना के तहत महत्वपूर्ण ढांचागत विषमाताओं को दूर करने की नीति हम अपना रहे हैं।"

उन्होंने कहा, "जब आम आदमी के हित की बात सामने आती है तो केंद्र सरकार धन मुहैया कराने में पीछे नहीं हटेगी।"

पड़ोसी देशों के साथ संबंध प्रगाढ़ होंगे :

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंगलवार को उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में भारत के अपने पड़ोसी देशों तथा विश्व की ताकतवर शक्तियों के साथ संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी।

प्रधानमंत्री ने कहा, "हम उम्मीद करते हैं कि आने वाले वर्षो में पड़ोसी देशों व विश्व की ताकतवर शक्तियों के साथ हमारे संबंध और भी प्रगाढ़ होंगे।"

उन्होंने कहा, "हमारी विदेश नीति का मुख्य उद्देश्य दीर्घकालिक आर्थिक विकास, शांति और क्षेत्र में स्थिरता के अनुकूल वातावरण बनाना है।"

खाद्य सुरक्षा पर जताई प्रतिबद्धता

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंगलवार को खाद्य सुरक्षा कानून लाने को लेकर अपनी प्रतिबद्धता तो जताई लेकिन महिला आरक्षण के मुद्दे पर वह ऐसा ही आश्वासन नहीं दे सके।

प्रधानमंत्री ने कहा, "सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून लाने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सरकारों के साथ प्रदेशों की सरकारी तथा अन्य हितधारकों के साथ परामर्श किया गया है।"

उन्होंने कहा, "राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक का मसौदा तैयार किया जा रहा है और इसे सार्वजनिक बहस तथा प्रतिक्रियाएं जानने के लिए जारी करने का प्रस्ताव है।"

महिला आरक्षण विधेयक के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने कहा, "महिलाओं का राजनीतिक सशक्तिकरण लैंगिक असमानता और भेदभाव दूर करने का सशक्त और अपरिहार्य औजार है।"

उन्होंने कहा, "लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं की कुल सीटों में से लगभग एक तिहाई महिलाओं के लिए आरक्षित करने के लिए राज्यसभा में छह मई 2008 को संविधान संशोधन विधेयक पेश किया गया जिसे नौ मार्च 2008 को राज्यसभा ने पारित कर दिया।"

शिक्षा का अधिकार कानून ऐतिहासिक :

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शिक्षा का अधिकार कानून को ऐतिहासिक करार देते हुए मंगलवार को कहा कि उनकी सरकार इसे सच्चाई में तब्दील करने के लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करेगी।

प्रधानमंत्री ने कहा, "छात्रों को निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार कानून एक ऐतिहासिक कदम है। यह कानून प्रांरभिक पढ़ाई पूरी होने तक बच्चों को पड़ोस के स्कूल में निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार देता है।"

उन्होंने कहा, "हम इस कानून को सच्चाई बनाने के लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करेंगे।"

उन्होंने कहा, "अपने बच्चों के सुनहरे भविष्य से अधिक महत्वपूर्ण हमारे लिए कुछ नहीं है। ये बच्चे ही हमारे सपनों को पूरा करेंगे। बच्चे ही हमारे सुनहरे भविष्य की उम्मीद हैं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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